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Monday, July 13, 2026

कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिला मिमरोट भाटिया ने पुराने इंदौर में वर्षों से लंबित भवन अनुज्ञा (नक्शा स्वीकृति) के मुद्दे पर चर्चा की

• पुराने इंदौर के नागरिकों के अधिकारों पर सरकार का ताला महापौर बताएं, आखिर उन्होंने क्या किया...?


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिला मिमरोट भाटिया ने पुराने इंदौर में वर्षों से लंबित भवन अनुज्ञा (नक्शा स्वीकृति) के मुद्दे पर भाजपा सरकार और नगर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है।

पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डाटा फॉर्म के नाम पर कई वर्षों से पुराने इंदौर के नागरिकों के नक्शे स्वीकृत नहीं किए जा रहे हैं, जो उनके संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों के मकान सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए, उन्हें आज तक समुचित मुआवजा नहीं मिला और अब जब वे अपनी ही भूमि पर नया निर्माण करना चाहते हैं, तब भी नगर निगम उनके नक्शे स्वीकृत नहीं कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह नियमों के अनुरूप अपनी स्वामित्व वाली भूमि पर निर्माण कर सके, लेकिन भाजपा सरकार और नगर निगम इस अधिकार से नागरिकों को वंचित कर रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से सवाल किया कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार यह कहते आ रहे हैं कि "जल्द ही डाटा फॉर्म से नक्शे मंजूर होना शुरू हो जाएंगे", लेकिन यह "जल्द" आखिर कब आएगा?

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नगर निगम स्वयं नक्शे स्वीकृत करने में असमर्थ है और नागरिक अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्माण कर लेते हैं, तो ऐसे निर्माणों को तोड़ने का नगर निगम के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है।


नामांतरण घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश दोषियों को बचाने में जुटा नगर निगम प्रशासन

नेता प्रतिपक्ष श्रीमती मिमरोट ने कहा कि वर्तमान समय में इंदौर नगर निगम का सबसे बड़ा मामला नामांतरण घोटाला है, जिसमें लगभग 360 नागरिकों की संपत्तियों का नामांतरण उनकी जानकारी के बिना दूसरे लोगों के नाम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला होने के बावजूद महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इस मामले की जांच अपर आयुक्त आकाश सिंह को सौंपी गई, लेकिन जैसे ही जांच रिपोर्ट आने की स्थिति बनी, मामले को लंबित रखने के उद्देश्य से तीन अपर आयुक्तों की नई जांच समिति गठित कर दी गई। उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल दोषी अधिकारियों को बचाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक रूप से जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों- उपयुक्त केशव सगर. प्रदीप जैन सहायक राजस्व अधिकारी अजीम खान, मयूर पाटील के विरुद्ध आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस अवधि में यह पूरा घोटाला हुआ, उस समय अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव संबंधित विभाग के प्रभारी थे, लेकिन उनके विरुद्ध भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं की कथित सहभागिता के कारण पूरे मामले को जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।

पाँच वर्ष बाद जागा नगर निगम अधिकारियों पर कार्रवाई हो गरीबों के आवास अधिकारों की अनदेखी करने वाले

श्रीमती सोनिला मिमरोट भाटिया ने नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा कॉलोनी अधिनियम में संशोधन किए जाने के बावजूद, नगर निगम प्रशासन को उसका पालन करवाने की याद 2026 में जाकर आई है।


अब नगर निगम द्वारा लगभग 300 बिल्डरों एवं कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी कर आश्रय निधि की राशि जमा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की किसी भी बिल्डर या कॉलोनाइजर के प्रति कोई विशेष सहानुभूति नहीं है, लेकिन यदि नगर निगम के अधिकारी समय पर नियमों का पालन करवाते, तो शहर में बने बहुमंजिला भवनों में बीपीएल एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध हो सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की गरीब विरोधी सोच के कारण इन नियमों का वर्षों तक पालन नहीं कराया गया।


नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम आयुक्त से मांग की कि-

वर्ष 2021 से अब तक नियमों का पालन न करवाने वाले सभी अधिकारियों की जांच कराई जाए। संबंधित अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) में इस लापरवाही का उल्लेख किया जाए। ऐसे अधिकारियों की आगामी पदोन्नति एवं वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का प्रस्ताव मध्यप्रदेश शासन को भेजा जाए।


जनआंदोलन की खुली चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिला मिमरोट भाटिया ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि यदि इन न्यायसंगत और जनहित की मांगों पर तत्काल ठोस विधिक कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो मुख्य विपक्षी दल इंदौर की जनता, सभी जागरूक व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं को साथ लेकर पूरे इंदौर शहर में एक ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत रहते हुए जनआंदोलन, नगर निगम मुख्यालय का घेराव और तालाबंदी करेगा।

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