नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (सीएचआरसी) के 47 वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए लाइव कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का विशेष शैक्षणिक प्रदर्शन आयोजित किया गया।
डाँ. अनिल कुमार लखवानी ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, श्रवण पुनर्वास (Hearing Rehabilitation) तथा ईएनटी चिकित्सा की उन्नत प्रक्रियाओं से परिचित कराना एवं चिकित्सा विज्ञान के प्रति उनकी रुचि बढ़ाना था।
कार्यक्रम में शहर के पाँच प्रतिष्ठित विद्यालयों के कुल 117 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें चोइथराम स्कूल (नॉर्थ कैंपस), सनमती हायर सेकेंडरी स्कूल, गरिमा विद्या विहार हायर सेकेंडरी स्कूल, एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल तथा प्रज्ञा गर्ल्स स्कूल के विद्यार्थी शामिल रहे।
अस्पताल के ऑडिटोरियम में आयोजित शैक्षणिक सत्र में वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. समीर निवसकर, डॉ. नितिका यादव एवं डॉ. रिचा अग्रवाल ने विद्यार्थियों को सुनने की क्षमता में कमी, कॉक्लियर इम्प्लांट की आवश्यकता, सर्जरी की प्रक्रिया, इसके लाभ तथा ऑपरेशन के बाद पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। वहीं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश दुधिया ने सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया की भूमिका एवं मरीज की सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा की।
इसके पश्चात ऑपरेशन थिएटर से लाइव कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे विद्यार्थियों ने ऑडिटोरियम में लाइव देखा। इस दौरान विशेषज्ञों ने सर्जरी के प्रत्येक चरण को सरल भाषा में समझाया तथा विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी में विद्यार्थियों ने कॉक्लियर इम्प्लांट, बहरेपन के कारण, सर्जरी की सफलता, ऑपरेशन के बाद सुनने की प्रक्रिया तथा स्पीच थेरेपी जैसे विषयों पर अनेक जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों के वैज्ञानिक एवं सरल उत्तर देकर विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया।
उत्कृष्ट प्रश्न पूछने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। प्रथम पुरस्कार एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल, द्वितीय पुरस्कार सनमती हायर सेकेंडरी स्कूल तथा तृतीय पुरस्कार गरिमा विद्या विहार हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अस्पताल प्रबंधन ने सभी विद्यालयों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, स्वास्थ्य जागरूकता तथा चिकित्सा क्षेत्र में करियर के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल के छात्र इब्राहिम रावतवाला ने प्रश्न किया कि बहरापन (सुनने में असमर्थता) और मूकता (बोलने में असमर्थता) एक-दूसरे से किस प्रकार जुड़े हुए हैं। इस पर विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि यदि कोई बच्चा जन्म से या कम उम्र में सुनने में असमर्थ होता है, तो वह ध्वनियों को सुन नहीं पाता, जिसके कारण भाषा का विकास प्रभावित होता है और बोलने की क्षमता भी विकसित नहीं हो पाती। समय पर जांच एवं कोक्लियर इम्प्लांट जैसे उपचार से बच्चों में सुनने और बोलने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
सन्मती हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हर्षिता जैन ने पूछा कि क्या सर्जरी के दौरान कभी ऐसी स्थिति आती है, जब ऑपरेशन के समय मिली नई जानकारी के आधार पर सर्जिकल प्लान में बदलाव करना पड़ता है। विशेषज्ञ ने बताया कि कुछ मामलों में ऑपरेशन के दौरान रोगी की शारीरिक स्थिति या अन्य चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर सर्जिकल योजना में आवश्यक परिवर्तन करना पड़ सकता है। ऐसे सभी निर्णय मरीज की सुरक्षा और सर्वोत्तम उपचार को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
गरिमा विद्या मंदिर की छात्रा दीपिका शर्मा ने प्रश्न किया कि क्या मरीज सर्जरी के तुरंत बाद सुन सकता है। इस पर चिकित्सक ने बताया कि कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के तुरंत बाद सुनाई देना शुरू नहीं होता। सर्जरी के बाद घाव भरने में लगभग 3 से 4 सप्ताह का समय लगता है। इसके पश्चात इम्प्लांट को सक्रिय (स्विच ऑन) किया जाता है तथा विशेषज्ञ द्वारा उसकी मैपिंग की जाती है। नियमित स्पीच थेरेपी और श्रवण प्रशिक्षण के माध्यम से मरीज धीरे-धीरे सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करता है।




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