नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में अनंत श्रीविभुषित श्री मदजगदगुरु रामानुजाचार्य श्रीनागोरिया पीठाधिपति स्वामीजी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज के मंगला शासन में श्री ब्रम्होत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का आयोजन 10 जुलाई 2026 से प्रारम्भ होकर 16 जुलाई 2026 तक अनेक उत्सवों के साथ संपन्न होगा।
उत्सव प्रारम्भ होने के पूर्व आज 09 जूलाई को सायंकाल 6 बजे से श्री विश्वकसेन भगवान का पूजन नाद स्वरम की मधुर धुन के साथ दक्षिण भारत से पधारे भट्टर स्वामी के द्वारा कराया गया जो कि श्रीमद जगद्गुरू रामानुजाचार्य नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामीजी श्री विष्णुप्रपपनाचार्य जी महाराज के मंगलाशासन में किया गया। श्री विश्वक सेन भगवान का पूजन सर्वप्रथम करने का मुख्य उदेश्य महोत्सव सआनंद बिना कोई विध्न के सुख समृद्धि के साथ सम्पन्न हो इसलिए उनका आहवान किया जाता है।
स्वामीजी महाराज द्वारा पूर्व आचार्यो का पूजन कर उत्सव करने की आज्ञा ली गई। देवस्थान के पुजारी व भक्तों द्वारा नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामीजी श्री विष्णुप्रपन्नाचर्य जी महाराज का चरण पूजन किया गया। इस अवसर पर श्रीवेंकटेश महिला मंडल के द्वारा श्री हनुमान जी का स्मरण कर संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ व सुंदर भजनों की भी प्रस्तुति हुई।
ब्रह्मोत्सव क्यों?
सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी के द्वारा संपन्न उत्सव ब्रह्मोत्सव कहलाता है। प्रायः सभी मंदिर मठों में प्रभु के मंगला दर्शन से शयन कराने तक की सभी दैनिक क्रिया सभी पुजारी एवं महंतों द्वारा की जाती आ रही है।
वर्षभर की पूजा के दौरान जो कमियां और त्रुटियां रह जाती है उन्हीं की पूर्ति हेतु ब्रह्मोत्सव के इन 7 दिनों में प्रभु का दिव्य राजोपचार के साथ महा स्नान, अभिषेक औषधि अर्पण दिव्य भव्य मनमोहक श्रृंगार उत्सव वाहन परिक्रमा हरिनाम संकीर्तन महाआरती उत्सव गोष्ठी से इन देव कार्य मूल का निवारण दक्षिण भारत पद्धति से वहां से पधारे विहत प्रकाष्ठ मृदुड स्वामी द्वारा संपन्न कराए जाते हैं।
ठाकुर जी के नित्य मुखौल्लास से सभी भक्त घर परिवार समाज-राष्ट्र गोवर्धन की कामना करते हैं। 10 जुलाई स्वर्ण स्तम्भ पर ध्वजारोहण के साथ होगा ब्रम्होत्सव का शुभारंभ।
श्रीब्रम्होत्सव का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया जाता है इस अक्सर पर दक्षिण से पधारे भट्टर स्वामी की टीम के द्वारा दक्षिण की पद्ति अनुसार देवस्थान में स्तिथ स्वर्ण खम्ब पर श्वेत वस्त्र पर गरुण भगवान को विराजमान कर ध्वज चढ़ाकर प्रार्थना की जाती है कि यह सप्त दिवसीय उत्सव सानंद सम्पन्न हो।
ध्वजारोहण अनंत श्रीविभूषित श्रीमदजगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीनागोरिया पीठाधिपति स्वामीजी श्री विष्णुप्रपपनाचार्य जी महाराज के द्वारा सम्पन्न किया जाएगा इस अवसर पर श्री रंगम से आये नादस्वरम वाद्य यंत्र भी गोविंदा गोविंदा की मधुर धुन गुंजायमान करेंगे।
तत्पश्चात शेषावतार श्रीरामानुज स्वामीजी के महाभिषेक दूध दही शकर,घी शहद और केशर जल की सहस्रधारा से किया जाएगा। साथ ही स्वामीजी की 1008 नामों से अर्चना की जायेगी उसके पश्चात संत सभा का आयोजन होगा।
प्रचार प्रमुख पंकज तोतला ने बताया महेंद्र नीमा रमेश चितलांगया, पुखराज सोनी,भरत तोतला, गोपाल नागोरी,सुमीत मंत्री, राजेन्द्र सोनी,पवन व्यास, गोविंद झवर,आशीष लड्डा,संपत धुत, मौजूद थे।
रात्री के सत्र में श्रीरामानुज स्वामीजी की सवारी देवस्थान परिसर में निकलेगी जिसमे अनेक श्रद्धालु पधारेंगे साथ ही सीहोर से हर्षित जी शास्त्री सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे ।विद्यर्थियों द्वारा स्तोत्र पाठ का वाचन किया जाएगा।
विशेष श्रंगार दर्शन
प्रथम दिवस पर बर्फीली घाटी से निर्मित सरोवर में शेषनाग छत्र छाया में विराजमान होकर प्रभु वैंकटेश प्रभु के मनोहारी दर्शन होंगे।


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