Breaking

Your Ads Here

Wednesday, June 17, 2026

इमाम बारगाहों में मजालिस और मातम का सिलसिला शुरू



डा. इफ्फत जकिया

नित्य संदेश, मेरठ। मुहर्रम का चांद दिखते ही पूरी दुनिया में पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नवासे हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) का गम शुरू हो गया। इमामबारगाहों में अलम  सजा दिए गए हैं। शहर के सभी इमाम बारगाहो में  मजालिस और मातम का सिलसिला शुरू हो गया  है। पूरी दुनिया में इमाम हुसैन (अ.स.) का गम   पारंपरिक तरीके से  से मनाया जा रहा है। 


घंटाघर स्थित इमामबाड़ा छोटी कर्बला में   अशरे की पहली मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी साहब ने मुहर्रम की महत्ता , इमाम हुसैन (अ.स.) के शोक में बहाय गए आंसुओं की फजीलत पर रोशनी डाली। उन्होंनेे अशरे के शीर्षक, “इमामत, ईलाही निज़ाम - ए -  हयात ” के तहत लोगों को संबोधित करते हुए  कहा कि , “इमाम हुसैन (अ.स.) की सभाएँ  एक बड़ी नेमत हैं, जो   इंसानियत आज़ादी, हिम्मत, नेकी, बिना स्वार्थ के काम करने और ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज उठाने की प्रेरणा देती हैं ।  उन्होंने आगे कहा कि कर्बला का जंग सिर्फ़ एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि हर ज़माने के इंसान के लिए ज़िंदगी देने वाली गाइडेंस और प्रैक्टिकल मॉडल है, जो उसे इंसाफ़ तथा  इंसानी मूल्यों की हिफ़ाज़त का एहसास कराती  है।” आखिर में, मौलाना ने इमाम हुसैन (अ.स.) के मदीना से कर्बला तक के सफ़र के दर्दनाक हालात,  तकलीफ़ों के साथ-साथ इस्लाम को  बचाने के लिए उनके अहल -ए -  बैत (अ.स.) और उन के साथियो की कुर्बानी के बारे में बताया, मजलिस में मौजूद सभी लोगों की आँखो से आंसू जारी हो गए।   सोज़ख्वानी  हिलाल आबिदी ने की ।


शहर वक़्फ़ मंसबिया घंटाघर स्थित अज़ाखाना शाह कर्बला में   मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी नें " इमामत और कुरान " शीर्षक के आधार पर अशरे को संबोधित किया । मजलिस में नसीम आबिदी ने सोज़ ख्वानी की ।  बड़ी संख्या में अकीदतमंदों नें शिरकत की  सैयदुश शुहादा इमाम हुसैन की खिदमत में अपने आंसूओं का नज़राना पेश किया ।  कोटला स्थित इमामबारगाह इनायत हुसैन खाँ में अशरा को मौलाना अल्ताफ़ हुसैन नें संबोधित किया ।


शहर की दूसरी इमामबारगाहों में भी अशरे शुरू हो गए हैं , जिनमें इमामबारगाह अली बख्श, इमामबारगाह छत्ता अली रजा, इमामबारगाह शाइक़ अली, इमामबारगाह करीम बख्श, इमामबारगाह मुजफ्फर अली मुअज्जिन, अजाखाना डॉ. इकबाल हुसैन, इमामबारगाह जाहिदियान वगैरह शामिल हैं। इसी तरह, शहर के अलग-अलग इमामबारगाहों में महिलाओं की  मजलिसों का सिलसिला भी शुरू हो गया है।


गौरतलब है कि 16 जून 2026 की शाम को जैसे ही मुहर्रम  का चांद आसमान में दिखा, गम और शोक का माहौल मातम मनाने वालों के दिलों में छा गया। छोटी कर्बला की इमामबारगाह में दानिश आबिदी ने सोज़ पढ़ा और उस्ताद अनवर जहीर अनवर मेरठी ने पारंपरिक मर्सिया पढ़ा, "ऐ मोमिनों हुसैन से मकतल  करीब है।" हुसैन के गम का अकीदतमंदों ने नम आंखों से स्वागत किया। मीडिया इंचार्ज डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मजलिसों का यह सिलसिला 9 मुहर्रम तक इसी तरह जारी रहेगा और 10 मुहर्रम को सभी इमामबारगाहों में अलविदाई मजलिसें होंगी।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here