नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में आयोजित सात दिवसीय योग शिविर के तीसरे दिन योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने साधकों को योग, प्राणायाम एवं प्राकृतिक जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने की एक संपूर्ण जीवन पद्धति है।
स्वामी कर्मवीर महाराज ने शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों को महायोग क्रिया-1 एवं महायोग क्रिया-2 का अभ्यास कराया तथा जालंधर बंध, उड्डीयान बंध, चंद्र प्राणायाम, सूर्य प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, नाड़ी चंद्र प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम सहित विभिन्न प्राणायामों एवं योगाभ्यासों की विधि और उनके लाभों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने पीठ एवं पेट संबंधी रोगों के लिए विशेष योगाभ्यास कराए तथा पशु विश्रामासन, वज्रासन, गोमुखासन, विमानासन और मार्जारासन जैसे आसनों का अभ्यास भी कराया। स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहा कि मन स्वभाव से चंचल होता है, लेकिन नियमित अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्राणायाम मन को शांत और स्थिर बनाता है तथा मानसिक एकाग्रता एवं आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है। उन्होंने योग दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि चित्त वृत्तियों का निरोध ही योग है। जब मन की चंचलता समाप्त होती है, तभी वास्तविक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अशांत व्यक्ति कभी भी वास्तविक सुख का अनुभव नहीं कर सकता।
योग गुरु ने बताया कि नियमित योग एवं प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति में दुखों को सहन करने की क्षमता विकसित होती है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रवण परंपरा के माध्यम से ज्ञान सहज रूप से स्मरण रहता है और उसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। स्वामी जी ने कहा कि मानव शरीर में दस प्रमुख प्राण कार्य करते हैं और प्राणायाम के माध्यम से इनकी शुद्धि एवं प्राणोत्थान होता है। उन्होंने सभी साधकों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक व्यक्ति को मित्रभाव से देखें। जब हम सभी प्राणियों में अपनी ही आत्मा का दर्शन करने लगते हैं, तभी हमारी वास्तविक योग यात्रा प्रारंभ होती है। स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि थायरॉयड जैसी समस्याओं में त्रिकुटा चूर्ण का प्रयोग लाभकारी हो सकता है। साथ ही उन्होंने बहुमूत्र, बच्चों में जल-संबंधी विकारों तथा अन्य सामान्य रोगों के लिए आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न उपायों की जानकारी भी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी औषधि का सेवन विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहा कि संपूर्ण जीवन प्राणों पर आधारित है और वृक्ष प्राणवायु के प्रमुख स्रोत हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पक्षियों की संख्या निरंतर घट रही है और उनकी मधुर चहचहाहट भी कम सुनाई देती है, जो पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है। उन्होंने प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षों एवं जीव-जंतुओं के संरक्षण का आह्वान किया। योग गुरु ने संतुलित आहार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भोजन में संयम और आवश्यकतानुसार कुछ खाद्य पदार्थों का परहेज करने से शरीर का वजन नियंत्रित किया जा सकता है तथा अनेक जीवनशैली जनित रोगों से बचाव संभव है।
इस दौरान कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला वित्त अधिकारी रमेश चंद्र परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्णा यादव, प्रोफेसर मृदुल कुमार गुप्ता प्रोफेसर वीरपाल सिंह प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा दो गुलाब सिंह रुहल, डॉ प्रदीप चौधरी डीआर दुष्यंत चौहान, डॉ सचिन कुमार, डॉक्टर वैशाली पाटील डॉ योगेंद्र गौतम डॉ अनिल यादव प्रोफेसर प्रशांत कुमार डॉ प्रदीप पवार , जगत सिंह दौसा, राजन कुमार डॉ संदीप त्यागी प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता इंजीनियर मनीष मिश्रा इंजीनियर मनोज कुमार सत्यम सिंह अमरपाल आदि मौजूद रहे।


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