नित्य संदेश, इंदौर। शुभ संकल्प समूह द्वारा किस्सागोई स्तंभ के अंतर्गत दिव्या माथुर (प्रवासी साहित्यकार व भूतपूर्व भारतीय उच्चायुक्त) की पुस्तक 'माया जाल' पर आभासी रूप से कार्यकम आयोजित किया गया। विशेष अतिथि भोपाल विश्व रंग के जवाहर कर्नावट, प्रसिद्ध साहित्यकार पूर्णिमा बर्मन (दुबई), साहित्यकार डॉ. संतोष खन्ना, रण विजय राव (भारतीय संसद में संपादक), आशीष शर्मा (इंडोनेशिया-वरिष्ठ साहित्यकार) एवं हरेराम वाजपेयी (इंदौर, वरिष्ठ साहित्यकार) का मुख्य आतिथ्य रहा।
कार्यकम में सभी ने दिव्या माथुर की पुस्तक पर विचार व्यक्त किए। समूह के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय चौरे, डॉ. रागिनी वाजपेयी, डॉ. अर्चना पंडित, डाॅ. पूनम विशाल और संतोष तोषीनीवाल आदि ने दिव्या जी से उनकी पुस्तक के बारे में प्रश्नोत्तर द्वारा अपनी जिज्ञासा का समाधान किया।
डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्या माथुर का कहानी-संग्रह ‘मायाजाल’ प्रवासी जीवन, मानवीय संबंधों, अकेलेपन, पारिवारिक तनावों और आधुनिक समाज की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है। पुस्तक की कहानियाँ मुख्यतः भारतीय प्रवासी समाज की पृष्ठभूमि में रची गई हैं। लेखिका ने दिखाया है कि भौतिक सम्पन्नता के बावजूद मनुष्य भावनात्मक रिक्तता और अकेलेपन के जाल में फँस सकता हैं। दिव्या माथुर की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और संवादप्रधान है।
कार्यकम का संचालन तंजानिया निवासी साहित्यकार सारिका जेथलिया ने किया। अतिथि स्वागत तथा आभार प्रदर्शन डॉ. श्रीवास्तव (इंदौर, शुभ संकल्प पब्लिकेशन की निदेशक) ने किया।

'शुभसंकल्प' संस्था, सुनीता श्रीवास्तव और उनकी टीम, प्रतिष्ठित वक्ताओं और श्रोताओ का हार्दिक आभार, मेरा बड़ा सौभाग्य कि मेरी कहानियाँ सभी को पसंद आयीं। 🙏🏼❤️🙏🏼
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