नित्य संदेश
गौरैया (विधा - दोहा)
चहक रही मुंडेर पर, गौरैया कर गान।
नीर सकोरा ढूँढती, करने को जल पान।।
तपन गीष्म की भीष्म है, कूप रहट सुनसान।
तरुवर काटो मत कभी, करो प्रकृति का मान।।
शीतल निमिया डाल पर, गौरैया का नीड़।
फुदक-फुदक कर नाचती, वृक्ष देख पथ चीड़।।
दाना दुनका खोजने, लंबी भरे उड़ान।
बाज शिकारी देखकर, भूल गई हृद भान।।
मुनिया रधिया दौड़कर, लाई डलिया घास।
बुने घोंसला नेह से, सुंदर अद्भुत खास।।
संरक्षण हो जीव का, देना जन संदेश।
गौरैया जल अन्न दे, छुपा रखो अंकेश।।
पर्यावरणी रोपणी, जीव सुरक्षित प्राण।
वृक्ष लगाए पथ नये, लेंगे पंछी त्राण।।
मृदा सकोरा ले मनुज, करे सदा जल दान।
सच्चे मानव की यही, होती है पहचान।।
—डाॅ सुषमा शर्मा 'श्रुति', इन्दौर


No comments:
Post a Comment