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Saturday, June 20, 2026

सात दिवसीय योग शिविर के छठे दिन स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने दिया योग, संतोष और लोककल्याण का संदेश

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ एवं क्रीड़ा भारती के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर आयोजित सात दिवसीय योग शिविर के छठे दिन योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने उपस्थित साधकों को योग, संतोष, आत्मकल्याण एवं लोककल्याण का प्रेरणादायी संदेश दिया। स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने पुरुषार्थ और परिश्रम में संतोष रखना चाहिए। संतोष ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। जब व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति संतुष्ट होता है तो उसके भीतर शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाओं और अपार धन-संपत्ति के बावजूद मनुष्य को वास्तविक शांति प्राप्त नहीं हो सकती, जबकि योग और आध्यात्मिक साधना व्यक्ति को आंतरिक शांति एवं आत्मिक आनंद प्रदान करते हैं।

योगाभ्यास के दौरान स्वामी जी ने साधकों को विभिन्न योग क्रियाओं एवं प्राणायामों का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि उड्डीयान बंध, मूल बंध, जालंधर बंध, सूर्यभेदी प्राणायाम तथा चंद्रभेदी प्राणायाम शरीर और मन को स्वस्थ रखने में अत्यंत लाभकारी हैं। विशेष रूप से सूर्यभेदी प्राणायाम के लाभों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे जोड़ों के दर्द, सर्दी-जुकाम तथा शरीर की शिथिलता जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है। योग मनुष्य के भीतर व्याप्त नकारात्मकता, तनाव और मानसिक अशांति को दूर करता है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति का स्वभाव शांत एवं संतुलित होता है तथा वह ईश्वर के अधिक निकट पहुंचता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं का विकास करना नहीं है, बल्कि समाज और संसार के कल्याण के लिए भी कार्य करना है। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा, “हे जीव! अपने ओज, अपनी शक्ति और अपनी क्षमता का स्मरण करो तथा संसार के कल्याण के लिए कार्य करो। यही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सद्भाव, सेवा और परोपकार की भावना से समाज के हित में कार्य करना चाहिए।

स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य को शुभ कार्यों को टालना नहीं चाहिए। जीवन अनिश्चित है, इसलिए जब भी अवसर मिले, अच्छे और लोकहितकारी कार्यों को तुरंत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपना भाग्य लेकर जन्म लेता है, किंतु पुरुषार्थ और सत्कर्मों के माध्यम से वह अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।

अपने प्रवचन में उन्होंने चार संग्रहशील प्राणियों—चींटी, चूहा, मधुमक्खी और मनुष्य—का उदाहरण देते हुए कहा कि संग्रह तभी सार्थक है जब उसका उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए। केवल संचय करने से जीवन में सुख और शांति प्राप्त नहीं होती, बल्कि त्याग, सेवा और सदुपयोग से ही जीवन धन्य बनता है।

योग शिविर में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला वित्त अधिकारी रमेश चंद्र परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्णा यादव कैंट विधायक अमित अग्रवाल अश्वनी गुप्ता प्रोफेसर वीरपाल सिंह प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा प्रोफेसर अनिल मलिक प्रोफेसर आलोक कुमार डॉक्टर गुलाब सिंह रुहल डॉक्टर ओमपाल सिंह डॉक्टर सचिन कुमार डॉक्टर अनिल कुमार यादव डॉ संदीप त्यागी जगत सिंह दोसा राजन कुमार अमरपाल सत्यम सिंह आदि मौजूद रहे।

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