वसीम अहमद
नित्य संदेश, मुंडाली। मुरलीपुर गांव के सात माह के मासूम रुदांश की दर्दनाक मौत ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया है। जिस उम्र में एक बच्चे को मां की गोद, प्यार और सुरक्षा की सबसे अधिक जरूरत होती है, उसी उम्र में उसे ऐसी मौत मिली जिसने पूरे क्षेत्र को गम और आक्रोश से भर दिया। पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को मासूम के शव को परिजनों द्वारा श्मशान घाट में पुनः दफना दिया गया। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और हर किसी के मन में एक ही सवाल था, आखिर इस मासूम का कसूर क्या था?
सात माह का रुदांश न तो किसी से दुश्मनी रख सकता था और
न ही किसी का कोई नुकसान कर सकता था। वह तो अभी ठीक से दुनिया को देख भी नहीं पाया
था। उसकी किलकारियां, उसकी मासूम मुस्कान और उसके भविष्य के सपने सब कुछ एक झटके में
खत्म हो गए। गांव के लोगों का कहना था कि बच्चे ने आखिर ऐसा क्या अपराध किया था, जिसकी
इतनी बड़ी सजा उसे मिली। पोस्टमार्टम के बाद जब मासूम के शव को अंतिम बार श्मशान घाट
ले जाया गया तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। वहां मौजूद महिलाएं और बुजुर्ग अपनी आंखों
के आंसू नहीं रोक पाए। कई महिलाओं ने कहा कि मां की ममता का उदाहरण पूरी दुनिया देती
है। एक मां अपने बच्चे के लिए हर दुख सह सकती है, लेकिन इस घटना ने लोगों के विश्वास
को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि रुदांश की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं,
बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर सवाल है। एक ऐसा सवाल जिसका जवाब हर कोई तलाश रहा
है।
गांव के लोगों के अनुसार, मासूम की मौत ने यह सोचने पर
मजबूर कर दिया है कि रिश्तों में पैदा होने वाले विवादों और स्वार्थ की आग में आखिर
बच्चों का क्या दोष होता है। गुरुवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद
बच्चे के शव को पूरे सम्मान के साथ श्मशान घाट में दफना दिया गया। अंतिम विदाई के समय
मौजूद लोगों की आंखों में आंसू और दिलों में पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी। हर कोई यही
कह रहा था कि भगवान किसी भी बच्चे के साथ ऐसा अन्याय न होने दे।
रुदांश अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मासूम तस्वीर
और उसकी दर्दनाक मौत लंबे समय तक लोगों के जहन में एक सवाल बनकर गूंजती रहेगी—
"आखिर मासूम रुदांश का कसूर क्या था?"

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