डा. इफ्फत जकिया
नित्य संदेश, मेरठ। सातवें दिन शहर की सभी इमामबारगाहों में इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में मजलिस, जुलूस और मातम का सिलसिला जारी रहा। सभी मजलिसों में हज़रत कासिम की शहादत बयान की गई आज सुबह 9 बजे मेरठ के लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला में अपनें शीर्षक " इमामत , ईलाही निज़ाम - ए - हयात " के तहत अशरे की मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी साहब ने कहा " कि हर चीज़ के तीन दौर होते हैं: भूतकाल, वर्तमान और भविष्यकाल। इसी तरह शिया धर्म को भी भूतकाल, वर्तमान और भविष्यकाल के संदर्भ में देखा जा सकता है। पैगंबर मुहम्मद (स.अ) के हिजरत के बाद शिया धर्म के अतीत की सबसे अहम घटना ग़दीर ख़ुम है, जहाँ पैगंबर (स.अ) ने अल्लाह के हुक्म से हज़रत अली (अ.स) को अपने बाद अपना वारिस और खलिफा बनाया।
डेढ़ लाख हाजियों की एक सभा में वफ़ादारी की कसम ली गई और उसी दिन लीडरशिप और इमामत का ऐलान किया गया। मौलाना ने बताया कि ग़दीर और कर्बला एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं; ग़दीर लीडरशिप का ऐलान है, जबकि कर्बला इस लीडरशिप को बचाने के लिए बड़ी कुर्बानी का इज़हार है। यज़ीद ने खुदा के बनाए सिस्टम को नज़रअंदाज़ करके ख़िलाफ़त पर कब्ज़ा कर लिया और इमाम हुसैन (अ.स) से वफ़ादारी की मांग की। इमाम ने इस बात से साफ़ मना कर दिया और कहा: “यज़ीद एक शराबी, कातिल, बिगड़ा हुआ और इज्ज़तदार रिश्तों की पवित्रता को तोड़ने वाला है, और मैं पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वा आलिहि वसल्लम) का नवासा हूँ जिन्हें अल्लाह ने बहुत महानताएँ दी हैं; ऐसे व्यक्ति के प्रति वफ़ादारी करना बिल्कुल नामुमकिन है।” मौलाना ने कहा कि कर्बला की भावना शहादत है। इमाम हुसैन ने ज़ालिम और ज़ालिम शासक के सामने झुकने के बजाय सिर कटवाना स्वीकार किया। अगर हम आज शियाओं की हालत जानना चाहते हैं, तो हमें ईरान को देखना चाहिए, जहाँ ईरान के लोगों ने अमेरिका और इज़राइल जैसी झूठी ताकतों के खिलाफ़ डटकर खड़े होकर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। ईरान के लोगों ने कर्बला की भावना को अपना आदर्श मानकर शहादत को ज़िंदगी का मकसद बनाया, और इस मज़बूती और आज़ादी ने उनकी हालत को रोशन कर दिया। अगर हम भी इसी भावना के साथ अपनी ज़िंदगी जिएं, तो अल्लाह की मर्ज़ी से, इमाम महदी (अस) के आने के बाद, हम उनकी सेना के सच्चे सिपाही बन पाएंगे। "
मजलिस के अंत में मौलाना बाकरी ने इमाम हसन (अ.स.) के बेटे शहजादा कासिम (अ.स.) की दिल दहला देने वाली शहादत का बयान किया । तेरह वर्षीय कासिम (अ.स.) तीन दिन तक भूखे-प्यासे दुश्मनों के सामने भालों, तीरों और तलवारों से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े , जालिमों ने उनके शरीर को अपने घोड़ों की टापों से रौंद दिया। यह दर्दनाक घटना सुनकर मातम करने वाले फूट-फूट कर रोने लगे। सोज़ ख्वानी सुहेल काजमी ने की ।
नमाज़ ज़ौहरैन के बाद मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने अज़ा खाना शाह कर्बला वक्फ मंसबिया में " इमामत और कुरान" शीर्षक से लोगों को संबोधित किया। मौलाना ने आज की मजलिस में हज़रत कासिम और हज़रत अली अकबर की शहादत का बयान किया। हज़रत अली अकबर और हज़रत कासिम की शहादत पर गमगीन लोग फूट-फूट कर रोए। मजलिस के बाद हज़रत कासिम और हज़रत अली अकबर के ताबूत की शबीह बरामद हुईं अंजुमन दस्ता ए हुसैनी ने मातम किया ।बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हज़रत फातिमा (अ.स.) को पुरसा दिया । शहर के अन्य इमामबाड़ों में भी तय समय पर मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी रहा।
मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मगरिब की नमाज के बादजुलूस-ए- जुल्जनाह दिल्ली गेट थाना स्थित छत्ता अली रजा वैली बाजार से शुरू हुआ। जुलूस इमामबारगाह छोटी कर्बला से होता हुआ अज़ाखाना शाह कर्बला में समाप्त हुआ। इस जुलूस के आयोजक अली हैदर (चांद) थे। जुलूस में शहर की तमाम मातमी अंजुमनों ने नोहा ख्वानी और सीनाजनी की। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया।

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