नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा नित्य योग शिविर के द्वितीय दिन योग आचार्य अमरपाल ने बड़ी संख्या में योग साधकों को योग अभ्यास कराया जिसमें सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, हलासन धनुरासन चक्रासन, मंडूकासन, कपालभाति, अनुलोमविलोम, उज्जाई प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम के लाभ बताएं तथा इन प्राणायाम से शरीर में होने वाले परिवर्तन को भी विस्तार से बताया।
योग विज्ञान विभाग के समन्वयक प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा ने कहा शरीर और मन को स्वस्थ रखने की अनमोल विधा है योग मानव शरीर पांच भौतिक तत्वों से मिलकर बना है जिसमें मन प्रधान रूप से इंद्रियों से व्यापार करता है उस उसे इंद्रियों के व्यापार को रोकने का सरल माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की एक वैज्ञानिक एवं प्राचीन भारतीय पद्धति है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर पंचमहाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से निर्मित है तथा मन इंद्रियों के माध्यम से निरंतर बाहरी विषयों की ओर आकर्षित होता रहता है।
योग साधना व्यक्ति को इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित करने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने तथा आंतरिक शांति प्राप्त करने का सरल एवं प्रभावी माध्यम प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शरीर स्वस्थ और रोगमुक्त रहता है, बल्कि तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है। वर्तमान भागदौड़ भरे जीवन में योग स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का सर्वोत्तम उपाय है। उन्होंने सभी योग साधकों से योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।


No comments:
Post a Comment