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Friday, June 5, 2026

बन रहे अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वालों की हो जांच और मुकदमा दर्ज

तरुण आहूजा 

नित्य संदेश, मेरठ: जिस तरह 30 से 40 साल पुराने निर्माणों पर अब कार्रवाई की जा रही है और उस समय तैनात रहे अधिकारियों पर भी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, उसी तरह वर्तमान में पदस्थ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। पिछले तीन से पांच वर्षों में बने या अब बन रहे अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार बाबू -अधिकारियों—चाहे वे जेई हों या एई—पर भी जांच के बाद कार्रवाई और मुकदमे दर्ज होने चाहिए। 


शास्त्री नगर के सेक्टर 1 से 13 तक पुराने निर्माणों पर कार्रवाई के तहत 661/6 पर ध्वस्तीकरण किया गया, जबकि 44 स्थानों पर सील लगाने की कार्रवाई हुई। कुछ अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज हुए साथ ही कुछ का तबादला भी हो गया। लेकिन यदि पिछले तीन से पांच वर्षों में बने अथवा वर्तमान में बन रहे अवैध निर्माणों की बात की जाए, तो कई मामलों में केवल आधी-अधूरी कार्रवाई होती दिखाई दी। क्षेत्र में दर्जनों निर्माण ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश नोटिस चस्पा हुए, लाल निशान लगाए गए,  , लेकिन उसके बाद न तो सीलिंग हुई और न ही ध्वस्तीकरण। आरोप है कि केवल खानापूर्ति कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि पिछले तीन से पांच वर्षों में  किस किस क्षेत्र में कौन - कौन जेई और एई  थे, सर्वे किसने किया किसने भेजी सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट।              

सवाल ये भी है कि जिन अधिकारियों ने 35 साल पुराने अवैध निर्माण की सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सुप्रीम कोर्ट भेजी । उनके कार्यकाल में हुए अवैध निर्माणों में से कितनो पर कार्यवाही  हुई ओर अगर नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई! यदि पुराने मामलों में  वो जिम्मेदारी तय कर सकते है,  अपने कार्यकाल की जिम्मेदारी भी तो उनकी है!  उन अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां दो मंजिला भवनों पर सेटबैक को लेकर कार्रवाई की जा रही है, वहीं कुछ स्थानों पर चार मंजिला निर्माण तक खड़े हो गए, लेकिन उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और समान नियम लागू होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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