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Tuesday, June 16, 2026

चिड़िया (लावणी छंद गीत) —डॉ सुषमा शर्मा 'श्रुति' इन्दौर

 

नित्य संदेश 

चिड़िया (लावणी छंद गीत)

​श्वेत-पीत से पंखों वाली, चिड़िया मलती उबटन है।

चिड़िया बैठी फूलों डाली, महका सारा उपवन है।।


​सोंधी-सोंधी पवन सुहानी, मौसम लगता पावन है।

कुसुमित सुरभित मधुबन प्यारा, कितना ये मनभावन है।।


लता-पात का छाजन छाया, पहन हरित सी अचकन है।

चिड़िया बैठी फूलों डाली, महका सारा उपवन है।।


​कलरव कर गौरैया गाती, धवल धार गिरते झरने।

तब सुरम्य सी लगती वादी, छटा लगी मनको हरने।।


भ्रमर हुए मकरंद मस्त हैं, तितली से ही अनबन है।

चिड़िया बैठी फूलों डाली, महका सारा उपवन है।।


​कली-कली से गूँथी माला, सौरभ लगती चंदन है।

वसुंधरा देखो मुस्काती, उदित सूर्य को वंदन है।।


नीड़ मनोहर बड़ा सुहाना, बसी मास ये अगहन है।

चिड़िया बैठी फूलों डाली, महका सारा उपवन है।।



डॉ सुषमा शर्मा 'श्रुति' इन्दौर

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