• मेरठ के किसानों को रास आ रही फल और सब्जियों की खेती
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। प्रदेश की योगी सरकार किसानों की आय को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। इन्हीं में से एक पॉली हाउस तकनीक जिले के किसानों को खूब रास आ रही है। जिले के किसान इन दिनों पॉली हाउस तकनीक से शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर, तोरई जैसी सब्जियों और गुलाब तथा जरबेरा जैसे फूलों की खेती करके अपनी विशेष पहचान बना रहे है। इसी कारण दस साल के भीतर जिले में पॉली हाउस की संख्या 2 से बढ़कर पचास हो गई है।
प्रदेश सरकार की सब्सिडी और प्रोत्साहन योजना के कारण भी किसानों का पॉली हाउस तकनीक की तरफ मोह बढ़ गया है। सरकार की ओर से इस योजना पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी अरूण कुमार के अनुसार 500 वर्ग मीटर से लेकर चार हजार वर्ग मीटर तक के क्षेत्र में पॉली हाउस बनाए गए हैं। चार हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र में पहले 844 रूपये वर्ग मीटर की लागत से सब्सिडी प्रदान की जा रही थी, जिसे प्रदेश सरकार ने अब बढ़ाकर 940 रूपये वर्ग मीटर कर दिया है। 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में यह धनराशि 1200 वर्ग मीटर की दर से देय है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 तक जिले में केवल दो पॉली हाउस थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर पचास हो चुकी है। इन दिनों जिले में लगभग डेढ़ लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पॉली हाउस स्थित हैं, इनमें से सक्रिय क्षेत्रफल 80 हजार वर्ग मीटर है।
इन क्षेत्रों में हो रहा उत्पादन
जिले में सरधना, माछरा, सरूरपुर, परीक्षितगढ़ क्षेत्रों में पॉली हाउस तकनीक को अधिक अपनाया जा रहा है। जिले में वर्ष 2025-26 में आठ नए पॉली हाउस का निर्माण हुआ है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी चार किसानों ने इसके लिए प्रस्ताव दिए है। वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक संजय सिंह ने बताया कि सकौती क्षेत्र में जरबेरा, सरधना के खेड़ा में गुलाब और सब्जियों की खेती, सलावा में शिमला मिर्च, रहमापुर में खीरा, चिंदौड़ी में मशरूम आदि का उत्पादन किया जा रहा है।
दो गुना उत्पादन मिलने से खुशी
खीरा उत्पादन में सक्रिय किसान यशपाल सिंह का कहना है कि पॉली हाउस में फसल उगाने पर दोगुना उत्पादन प्राप्त हो रहा है। इस तरीके से उगाई गई फसल के बाजार में दाम भी अच्छे मिलते हैं। सलावा के आकाश सिंह ने कहा कि पॉली हाउस आधुनिक तरीके से फसल करने की एक संरक्षित विधि है। उन्होंने इस विधि से शिमला मिर्च की फसल उगाकर बेहतर आय प्राप्त की है। प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से यह योजना सोने पर सुहागा जैसी साबित हो रही है।

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