विश्वास राणा
नित्य संदेश, गजरौला। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित वेंकटेश्वरा संस्थान में "नारी शक्ति वंदन अधिनियम विकसित भारत के लिए जरूरी या नहीं" विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का शानदार आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित वक्ताओं ने एक सुर में इस बिल को ना केवल महिला सशक्तीकरण बल्कि विकसित राष्ट्र निर्माण के लिए "मील का पत्थर" बताते हुए सभी से एकजुट होकर 2029 के चुनाव से पूर्व इसे लागू कराने की वकालत की। इसके साथ ही संस्थान द्वारा इसके लिए अन्य संस्थानों एवं स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर जन जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।
वेंकटेश्वरा संस्थान के टैगोर सभागार में "नारी शक्ति वंदन अधिनियम विकसित भारत के लिए जरूरी या नहीं’’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय संगोष्ठी का शुभारम्भ प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी, कुलपति प्रो0 कृष्ण कान्त दवे, शुभम चौधरी, डाॅ0 नीतू पंवार आदि ने सरस्वती माँ की प्रतिमा के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया। अपने सम्बोधन में प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी ने कहा कि संस्कृति सम्मान एवं मातृशक्ति सम्मान से परिपूर्ण भारत देश में सदियों से महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि रहा है। लेकिन लिंगानुपात के हिसाब से देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली सम्मानित मातृशक्ति का देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधित्व बहुत कम है। बहुत सारी संस्थाएं ऐसी भी है, जहां मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व दस प्रतिशत से भी कम है। जहां एक तरफ यह संविधान में निहित ’’समानता का अधिकार’’ (राईट टू इक्विलिटी) का उल्लंघन है, वही दूसरी ओर इससे देश की आधी सम्मानित मातृशक्ति के सामाजिक, आर्थिक,स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक स्थितियों पर भी इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। अब समय आ गया है कि हम सब एकजुट होकर ’’नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू कराकर ’’विकसित भारत’’ के लक्ष्य को 2047 से पहले ही पूरा करने का संकल्प ले। इस अवसर पर डाॅ0 नीतू पंवार, डाॅ0 सुमन कुमारी, डाॅ0 स्नेहलता गोस्वामी, डाॅ0 आशिया वाहिद, डाॅ0 ज्योति सिंह, डाॅ0 अंजलि भारद्वाज, डाॅ0 मंजरी राणा, डाॅ0 रीना जोशी, डाॅ0 शिल्पा रैना, डाॅ0 प्रीति गुप्ता, डाॅ0 कोमोलिका, अनुषा कर्णवाल, मिस अंकुश, डाॅ0 शहजादी, मेरठ परिसर से निदेशक डाॅ0 पंकज चैधरी, मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।
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