नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। छत्रपति शिवाजी सुभारती अस्पताल, मेरठ में चिकित्सकों की दक्ष टीम ने अत्याधुनिक जीवन रक्षक तकनीक ईसीएमओ (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन) का सफल उपयोग करते हुए एक गंभीर रूप से विषाक्तता के शिकार मरीज को नया जीवन प्रदान किया। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल की चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।
मरीज को अत्यंत नाजुक स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उसने अत्यधिक मात्रा में एल्युमिनियम फॉस्फाइड (सेल्फोस) जैसे जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था, जिसके कारण उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी। चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ईसीएमओ सपोर्ट प्रदान किया। लगभग 96 घंटे की निरंतर निगरानी और उपचार के बाद मरीज को सुरक्षित रूप से ईसीएमओ से हटाया गया। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज के लिए तैयार है।
ईसीएमओ एक उन्नत जीवन रक्षक तकनीक है, इस तकनीक का उपयोग गंभीर हृदय विफलता, फेफड़ों की विफलता, गंभीर संक्रमण और विषाक्तता जैसे जटिल मामलों में किया जाता है। इस सफल उपचार का नेतृत्व हृदय रोग सेवाओं के निदेशक डॉ. जगदीश के मार्गदर्शन में हृदय शल्य चिकित्सा टीम द्वारा किया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ईसीएमओ और सीआरआरटी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं अब सुभारती अस्पताल, मेरठ तथा लोकप्रिय अस्पताल में भी उपलब्ध हैं। पहले ये सुविधाएं मुख्य रूप से दिल्ली जैसे महानगरों तक सीमित थीं, लेकिन अब मेरठ में भी गंभीर मरीजों को उच्चस्तरीय उपचार मिल पा रहा है, जो क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
सुभारती अस्पताल की इस विलक्षण उपलब्धि के लिए सुभारती ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने डॉ. जगदीश, डॉ. कृष्णमूर्ति तथा उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी है। अस्पताल ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की विषाक्तता या आपात स्थिति में देरी न करें और तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें, क्योंकि समय पर इलाज जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

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