Breaking

Your Ads Here

Friday, April 24, 2026

“जीवंत परंपराओं के रूप में भारतीय ज्ञान: समकालीन संदर्भों में लोक-साहित्य और स्वदेशी ज्ञान “ विषय पर एक साप्ताहिक राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (ऑनलाइन) का शुभारंभ

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। आईकेएस सेल एवं समाज विज्ञान संकाय, शहीद मंगल पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में न्यूक्लियस ऑफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट के सहयोग से एम ओ यू के तहत “जीवंत परंपराओं के रूप में भारतीय ज्ञान: समकालीन संदर्भों में लोक-साहित्य और स्वदेशी ज्ञान “ विषय पर एक साप्ताहिक राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (ऑनलाइन) का शुभारंभ हुआ । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपराओं को समकालीन संदर्भों में विश्लेषित करते हुए उनकी उपयोगिता निर्धारित करना है ।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. अंजू सिंह द्वारा दिए गए स्वागत भाषण से हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर लोक-साहित्य और स्वदेशी ज्ञान, केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को शिक्षकों की भारतीय ज्ञान परंपरा में अभिरुचि के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया तथा आयोजन के लिए आयोजकों से टीम को बधाई दी। आज के दिवस की मुख्य वक्ता व विषय विशेषज्ञ डॉ. सास्वती बारदोलोई सहायक प्रोफेसर एवं. सह-समन्वयक, भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) सेल, असम रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी, असम रहीं । डॉ. सास्वती बारदोलोई ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों की नींव: अवधारणाएँ, स्रोत और ज्ञानमीमांसाएँ विषय पर विस्तृत एवं व्यावहारिक चर्चा की। आपने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ एक बहुआयामी और समृद्ध बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनकी जड़ें प्राचीन भारतीय सभ्यता में निहित हैं। है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली की मूल अवधारणाएँ जीवन, ब्रह्मांड और मानव अस्तित्व के समग्र दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती हैं।

इसके अतिरिक्त, आपने भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध और व्यापक स्रोतों का भी विश्लेषण किया और बताया कि श्रुति साहित्य वेद, उपनिषद ये ज्ञान के शाश्वत और अपौरुषेय स्रोत माने जाते हैं। स्मृति साहित्य रामायण, महाभारत, मनुस्मृति ये सभी सामाजिक नियमों, नैतिकता और आचार संहिता को व्यवस्थित करते हैं। दर्शन शास्त्र में  षड्दर्शन के साथ बौद्ध और जैन दर्शन को भी महत्वपूर्ण माना। आपने भारतीय ज्ञान परंपरा के अन्य स्रोतों में आयुर्वेद, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, नाट्यशास्त्र लोकज्ञान, लोक-साहित्य और परम्पराओं का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा प्रश्न पूछे गए। रिसोर्स पर्सन द्वारा सभी प्रश्नों का संतोषजनक, स्पष्ट एवं उदाहरणों सहित उत्तर दिया गया।

कार्यक्रम का समापन प्रो ० लता कुमार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विषय विशेषज्ञ डा सास्वती , बारदोलोई, मुख्य संरक्षक प्रो बी एल शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश, प्राचार्या महोदया, आयोजक समिति के सदस्यों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम की सफलता में सभी के सहयोग की सराहना की।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here