नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान,में 11वीं सुभारती एवं उन्मुक्त भारत राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता-2026 “निष्क्रिय इच्छामृत्यु गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार है, न कि जीवन की पवित्रता के लिए खतरा” विषय पर आयोजन किया। यह वाद-विवाद प्रतियोगिता सुभारती विधि महाविद्यालय द्वारा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई। प्रतियोगिता का आयोजन सुभारती विधि महाविद्यालय के निदेशक, राजेश चंद्र (पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के मार्गदर्शन और विधि संकाय की डीन, प्रोफेसर (डॉ.) रीना बिश्नोई के पर्यवेक्षण में किया गया।
प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई , डीन, विधि संकाय, ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और उन्हें प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। सुभारती विधि महाविद्यालय के निदेशक, राजेश चंद्र ने सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। यह वाद-विवाद सुभारती विधि महाविद्यालय के मूट कोर्ट एसोसिएशन और साहित्यिक क्लब द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। संकाय प्रशिक्षक डॉ. आफरीन अल्मास और सुश्री मुस्कान श्रीवास्तव ने प्रतियोगिता के बारे में बताया कि इसमें डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ (एनएलयू), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मेघालय (एनएलयू),नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची (एनएलयू),इलाहाबाद विश्वविद्यालय,बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर, एलायंस यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु, मैट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर, पारुल विश्वविद्यालय, वडोदरा, बेनेट यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा, वीआईटी चेन्नई, महिंद्रा यूनिवर्सिटी, हैदराबाद, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर आदि विश्वविद्यालयों की 34 टीमों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि इस वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय था “निष्क्रिय इच्छामृत्यु गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार है, न कि जीवन की पवित्रता के लिए खतरा”। प्रतिभागियों को अपनी बात हिंदी या अंग्रेजी में कहने की स्वतंत्रता थी।
शिवानी चौधरी और पार्थ मल्होत्रा प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल थे, जिन्होंने बी.एन.एस. और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 पर आधारित कई प्रश्न पूछे। छात्रों ने अपने कथनों के समर्थन में अरुणा रामचंद्र शानबाग बनाम भारत संघ (2011), कॉमन कॉज बनाम भारत संघ, 2018 और हाल ही के मामले हरीश राणा बनाम भारत संघ, 2026 और अन्य प्रस्तुत किया। सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार हरमनंत कौर और पार्थ रैना विधि संकाय, जम्मू विश्वविद्यालय ने जीता। प्रथम सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार महिंद्रा विश्वविद्यालय (हैदराबाद) के वेलमुरी निहार ने जीता। द्वितीय सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी के विधि महाविद्यालय (मुंबई) की तपस्विनी को मिला। तृतीय सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार जम्मू विश्वविद्यालय के विधि विद्यालय के पार्थ रैना ने अपने नाम किया।
बीए.एलएलबी प्रथम वर्ष की छात्रा सना ने एंकर और मॉडरेटर की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता में स्वयंसेवकों में ओम ठाकुर, सृष्टि सिरोही, विवेक कुमार उपाध्याय एवं भारती सैनी शामिल रहे। इस वाद-विवाद प्रतियोगिता में डॉ. सारिका त्यागी, प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्रा, प्रो. (डॉ.) टी.एन.प्रसाद, शालिनी गोयल, सोनल जैन, अरशद आलम, अनुराग चौधरी, आशुतोष देशवाल, हर्षित संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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