तरुण आहूजा
नित्य संदेश, मेरठ। निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि कई स्कूल पहले तो नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रहे हैं, और उसके बाद फीस, किताबों तथा ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर अभिभावकों से भारी रकम वसूल रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों द्वारा “फ्री एडमिशन” का प्रचार कर बच्चों का दाखिला कराया जाता है, लेकिन इसके बाद विभिन्न मदों में फीस वसूली शुरू हो जाती है। किताबों और यूनिफॉर्म को भी निर्धारित दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है। इसके अलावा, समय-समय पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के नाम पर भी बच्चों से बार-बार पैसे मंगवाए जाते हैं।
कुछ अभिभावकों का आरोप है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य शैक्षणिक कम और मनोरंजन अधिक होता है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे स्कूलों की जांच कराई जाए और फीस संरचना व अन्य खर्चों पर नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी पर रोक लग सके।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज:
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने संबंधित विभाग से पारदर्शिता और सख्ती से नियम लागू कराने की अपील की है।
सपा कार्यकर्ताओं ने किया जिलाधिकारी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन:
स्कूलों के खिलाफ आज सपा कार्यकर्ताओं ने भी जिलाधिकारी कार्यलय के बाहर हंगामा किया और फीस किताबों व ट्रांसपोर्ट के नाम पर वसूली का आरोप लगाया!
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