नित्य संदेश ब्यूरो
रोहटा। डूंगर गांव में सो वर्षों से संचालित चरम शोधन कारखाने के एनजीटी के आदेशों के बाद बंद होने की प्रशासन द्वारा दस दिन पूर्व की गई कार्यवाही के बाद एन जी टी ने हापुड़िया लेदर प्रोसेसिंग सोसाइटी से भी जवाब तलब किया है। ओर वही 13 वर्षों से अवैध रूप से चलाए जा रहे कारखाने से जिन किसानों को क्षति हुई है। उसके लिए एक समिति का गठन कर छ माह में रिपोर्ट देने के आदेश जारी किए हैं।
बता दे कि ग्राम डूंगर में दशकों से एक चर्म शोधन कारखाना हापुड़िया लेदर प्रोसेसिंग सोसाइटी के तत्वावधान में संचालित था। गांव पुठ खास ओर आजमपुर के किसानों ने कारखाने से फैलने वाले प्रदूषण ओर खेतों को जो उक्त कारखाने से निकलने वाले प्रदूषित पानी से होने वाली क्षति को लेकर प्रदूषण विभाग से लेकर हाई कोर्ट तक जन हित में याचिका दायर की थी। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष ने 22 मार्च 2013 को पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए तत्काल बंदी के आदेश दिए थे। लेकिन प्रशासन स्तर से बंदी की कार्यवाही नहीं की गई और कारखाना संचालित रहा। तो उसके बाद गांव पुठ खास निवासी सूरजबली सैनी ने एनजीटी मे जन हित याचिका दायर कर उक्त कारखाने को तत्काल बंद कराने की गुहार लगाई। एनजीटी के न्यायधीश ने सुनवाई करते हुए हापुड़िया लेदर सोसाइटी के अध्यक्ष ओर सचिव को कई बार नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के लिए तालाब किया। लेकिन सोसाइटी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। ओर जांच में पता चला कि जो सोसाइटी बनाई गई थी उस सोसायटी की समयावधि कई वर्ष पूर्व पूरी हो चुकी है। लेकिन जब कोई जवाब सोसायटी की तरफ से एनजीटी मे दाखिल नहीं किया गया।
फरवरी माह में एन जी टी ने सुनवाई करते हुए उक्त कारखाने को तत्काल बंद करने के आदेश डीएम मेरठ को दे दिए। लेकिन उन्होंने एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं किया तो उन्हें दो अप्रैल को खुद अपना जवाब देने के लिए तलब कर लिया। लेकिन डीएम मेरठ बंद करने के आदेशों का सही से कोई जवाब नहीं दे पाए। तो 17 अप्रैल तक कारखाने को बंद करने के आदेश राज्य के प्रमुख सचिव को दिए। उसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। ओर 13 अप्रैल को जिला प्रशासन ने कई थानो की पुलिस बल के साथ गांव डूंगर में दशकों से संचालित चर्म शोधन कारखाने को बंद करा दिया ओर 17 अप्रैल को प्रमुख सचिव की ओर से बंदी की कार्यवाही एनजीटी को सौंप दी गई। उसके बाद एनजीटी की पीठ ने आदेश दिया। कि जो जांचें अब तक कारखाने की हुई है। उनमें मृत पशुओं की खाल का उपयोग करके चमड़ा रंगने से जहा पर्यावरण के मानदंडों का जमकर उल्लंघन किया गया है।
जांच में जन जीवन के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत ही खतरनाक पाई गई है। जिसके कारण पर्यावरण को भरी हानि हुई है। क्षेत्रवासियों को भारी क्षति हुई है। इसके लिए सचिव यूपीपीसीबी ओर जिला मजिस्ट्रेट के साथ समिति गठित करने के आदेश दिए है। जो पर्यावरण मानदंडों के कारण 13 वर्षों में हुए किसानों के नुकसान का आकलन करेगी। उचित निवारणात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। कमेटी को अग्रिम छ माह में अपनी यह रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी विभाग को सौंपनी होगी। जो भी किसानो को नुकसान हुआ उसकी क्षति पूर्ति का जुर्माना हापुड़िया लेदर सोसायटी पर लगाकर वसूल करने के निर्देश दिए है। इससे हापुड़िया सोसाइटी के पदाधिकारियों में हड़कंप की स्थिति व्याप्त हो गई है।
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