नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। गुड फ्राइडे बड़े हर्ष और उल्लास के साथ कुछ इस तरह मनाया गया, जिसमें कवि विजय प्रेमी शब्द वंशी के घर को गीत मुक्तक और गजलों से महकाया गया। कवि प्रेमी शब्द वंशी ने कहा _ खुशबुओं से बात करके देखिए, जिंदगी किताब करके देखिए। आंसुओं से आंख मुस्कुराएंगी, दर्द का हिसाब करके देखिए।
वहीं ईश्वर चंद्र गंभीर ने कहा_ मैं समंदर की गहराई तक भी गया, मुझको माटी मिली एक मोती नहीं, लोग क्या क्या किनारों पर ही पा गए, सबकी तकदीर एक जैसी होती नहीं बहुत जम कर गंभीर जी को सराह गया स्मरण रहे श्री गंभीर जी ने अब तक कविताओं के अतिरिक्त विभिन्न विषयों पर लगभग ४० पुस्तके लिखी है। जिनका देश के सड़क परिवहन मंत्री सहित श्री गडकरी सहित अन्य बड़े कर्णधारों द्वारा विमोचन हो चुका है श्री सुदेश दिव्य ने कहा_ संभल कर बोलना हमसे, बहुत मुहजोर हैं हम भी, अगर दरिया तुम्हें कहते हैं, तो गोता खोर हैं हम भी। मेरठ के तीन प्रसिद्ध कवि जब एक साथ अपनी अपनी कविताएं सुनाएं तो सोचिए उस माहौल को क्या कहा जाएगा।श्रोताओं को मोबाइल पर लाइव दिखाया गया। विशेष उपस्थिति रही अहमदाबाद से पधारे श्री प्रदीप बंसल जी की जिन्होंने अपने विचार भी साझा किए।

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