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Monday, April 27, 2026

शाही ईदगाह - मैं तो निशानी सल्तनत-ए-मुगलियत हूं ...

'दिल्ली की कुतुबमीनार से भी पुराना है मेरा वजूद' - 'मुझ पर कब्जे की जंग से कहीं मैं बिखर न जाऊं'

सलीम सिद्दीकी

नित्य संदेश, मेरठ। मैं एक इतिहास हूं, एक ऐसा इतिहास जिसे इतिहासकार मुहम्मद गौरी के सिपहसालार कुतुबुद्दीन ऐबक ने लिखा। मैं क़ौम का वो सरमाया हूं जिसे सैकड़ों सालों से लोगों ने संजोकर रखा। मैं गवाही हूं उस इबादतगाह की, जिस में लाखों सिर एक साथ खुदा के सामने झुकते आए हैं। मेरा वजूद तो दिल्ली की ऐतिहासिक कुतुब मीनार से भी पुराना है। इन सबके बावजूद आज मेरे वजूद से कुछ लोग टकराने को तैयार बैठे हैं। पता नहीं मुझ में ऐसा क्या है कि लोग मेरे लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर तक में पड़ गए। अगर यही हाल रहा और लोग मुझे हासिल करने के लिए मेरे वजूद से टकराते रहे तो एक दिन मैं टूट जाऊंगी। 


मैं कोई कहानी नहीं जिसे लोग जब चाहें लिखने बैठ जाएं। मैं तो वो इतिहास हूं जिसे दोहरा दिया जाए तो सल्तनत ए मुगलियत के पन्ने खुल जाएं। जब कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1192 में मेरी तामीर कराई थी, उस वक्त मैंने यह सोच भी न था कि एक दिन लोग मुझे बारगाह ए इलाही से राजनीति का अड्डा बनाने पर तुल जाएंगे। मैं कोई प्रॉपर्टी नहीं हूं जिसकी ओर लोग हसरत भरी निगाहों से देखें। मैं तो क़ौम के नाम वक्फ हूं ताकि लोग मेरी गोद में बैठकर उस खुदा की इबादत में मशगूल हों जिसने इस पूरी कायनात का वजूद कायम किया। जिस वक्त मेरे गले में शाही ईदगाह का तमगा डाला गया, उस वक्त मेरी बदहाली किसी से छिपी नहीं थी, लेकिन भला हो उन लोगों का जिन्होंने शहर की आवाम को साथ लेकर मुझे फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। आज जब मैं खुद अपने पैरों पर खड़ी हूं तो न जाने क्यों कुछ मुट्ठी भर लोगों को अखर रही हूं। मैंने तो कई परिवारों को अपने अंदर आसरा तक दे रखा है। मैं तो विवादों से बहुत दूर रहना चाहती हूं। 


1933 से लेकर आज तक भी मेरे वजूद पर किसी ने अंगुली तक नहीं उठाई, लेकिन अब न जाने क्यों मुझे जंजीरों में जकड़ने की कोशिशें हो रही हैं। अरे मैं किसी की जागीर नहीं हूं। मैं तो क़ौम के नाम वक्फ हूं। मैं उन लोगों से यह अपील करती हूं जो मुझे जंजीरों में जकड़ना चाहते हैं कि मेरे वजूद से खिलवाड़ मत करिए। तुम्हे ख़ुदा का वास्ता। क़ौम के इस इदारे की साख को बट्टा मत लगाइए। मैं शाही विरासत होने के साथ-साथ एक तरह से क़ौम की अलंबरदार भी हूं। मेरे चाहने वालों ने मुझे बहुत कुछ बक्शा है, लेकिन अब अगर मेरे मुस्तकबिल को किसी ने गिरवी रखने की कोशिश की तो मैं बुरी तरह टूट कर बिखर जाऊंगी। ... ख़ुदा हाफ़िज़ 

➡️ क्या है हालिया विवाद 

ईदगाह के पल्लू से विवाद तो कई जुड़ चुके हैं, लेकिन हालिया विवाद दो बार नमाज की अदायगी को लेकर है। दरअसल बकरीद सिर पर है। एक पक्ष चाहता है कि ईदगाह में इस मर्तबा दो बार नमाज अदा हो, ताकि अधिक से अधिक लोग ईदगाह में नमाज अदा कर सकें, जबकि दूसरे पक्ष को यह मंजूर नहीं। मामला अभी पेंडिंग है। ईदगाह कमेटी की बैठक के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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