नित्य संदेश ब्यूरो मेरठः
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा “मीडिया, सामाजिक उत्तरदायित्व और सतत विकास : एक बहुआयामी दृष्टिकोण” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित सत्यजीत रे सभागार में किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर के शिक्षाविदों, मीडिया विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर समसामयिक मीडिया परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का स्वागत पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हरित स्वागत के रूप में पौधे भेंट कर किया गया, जो सतत विकास की अवधारणा को सशक्त रूप से दर्शाता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) पी.के. शर्मा, मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ फिल्ममेकर व शिक्षाविद् अमलान कुसुम घोष, वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार जयंती रंगनाथन, आबिद रज़ा, प्रो.(डॉ.) अजिताभ दास, भारत एक्सप्रेस राष्ट्रीय समाचार चैनल के एंकर सूर्य त्रिपाठी तथा शहीद मंग पांडेय गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्रोफेसर कैप्टन (डॉ.) लता कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि विभा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया समाज में जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम है और यह सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन ने पत्रकारिता में सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता को सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए विद्यार्थियों को निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकार बनने की प्रेरणा दी।
उत्तर प्रदेश विधान सभा, लखनऊ के संपादक आबिद रज़ा ने डिजिटल युग में मीडिया के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में तथ्यात्मकता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन माध्यम से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार व सिने अभिनेता डॉ. प्रवीण तिवारी ने मीडिया और सिनेमा की भूमिका पर चर्चा करते हुए अपनी फिल्म “गोदान” का उदाहरण प्रस्तुत किया और भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि “मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली एक सशक्त शक्ति है। आज आवश्यकता है कि पत्रकारिता सत्य, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़े। शिक्षा संस्थानों का दायित्व है कि वे ऐसे मंच प्रदान करें, जहां विद्यार्थी न केवल ज्ञान अर्जित करें, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझें।”
विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो.(डॉ.) श्लया राज ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि “इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उन्हें सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत युवाओं को चाहिए कि वे सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और सतत विकास के दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बनाएं।”
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. रितेश चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को समसामयिक मुद्दों, चुनौतियों और संभावनाओं से परिचित कराते हैं तथा उन्हें समाधान उन्मुख सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 70 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 150 से अधिक शोधार्थी, शिक्षक, विद्यार्थी एवं मीडिया विशेषज्ञों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से प्रतिभाग कर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। उद्घाटन सत्र का सफल संचालन डॉ. प्रीति सिंह द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रो. अशोक त्यागी, डॉ. संतोष कुमार गौतम, डॉ. आशुतोष वर्मा, राम प्रकाश तिवारी, शैली शर्मा, तरुण जैन, गुंजेश ओझा, डॉ. भंते चंद्रकीर्ति, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. एस.सी. तिवारी, डॉ. रीना विश्नोई, डॉ. ज्योति गौर, डॉ. अमृता चौधरी, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. किरण, डॉ. स्वाती शर्मा, डॉ. सारिका अभय सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह संगोष्ठी मीडिया, सामाजिक उत्तरदायित्व और सतत विकास के विषय पर एक सार्थक विमर्श के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
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