नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। राष्ट्रीय टीकाकरण से लेकर पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान की मॉनिटरिंग पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। कारण, मेरठ सहित पूरे प्रदेश में एनपीएसपी (नेशनल पोलियो सर्विलांस प्रोजेक्ट) के एफएम (फील्ड मॉनिटर्स) को घर बैठाने की तैयारी कर ली गई है। इसे लेकर मेरठ सहित पूरे प्रदेश के 916 एमएम के परिवारों के समक्ष रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बता दें कि यह एफएम, एनपीएसपी के माध्यम से सर्विलांस के साथ साथ पोलियो और आरआई (रुटीन इम्यूनाइजेशन) से लेकर संचारी रोग जैसे अभियानों की मॉनिटरिंग कर सरकार को वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हैं। उल्लेखनीय है कि मेरठ में एनपीएसपी के लगभग डेढ़ दर्जन और प्रदेश भर में 916 मॉनिटर्स हैं, जिनकी सेवाएं समाप्त करने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में मॉनिटर्स का एक डेलिगेशन दो दिन पहले गाजीपुर के अजय यादव के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिला था। अब देखना है कि सरकार एक लंबे अरसे से एनपीएसपी के साथ काम कर रहे इन मॉनिटर्स को संजीवनी दे पाती है या नहीं।
मेरठ में स्थिति और खराब
दरअसल मेरठ की एनपीएसपी यूनिट की कार्यप्रणाली को एनपीएसपी से जुड़े कुछ लोगों ने कटघरे में खड़ा किया है। आरोप है कि यहां कुछ समय पूर्व मॉनिटर्स, एसएमओ (मेडिकल सर्विलांस ऑफिसर), एसआरटीएल (सब रीजनल टीम लीडर) और एक प्रशासनिक सहायक के बीच आपसी खींचतान के चलते एनपीएसपी और आईपी ग्लोबल के उच्चाधिकारियों द्वारा जांच बैठा दी गई, जिसमें पता यहां तक चला कि इस जांच में एनपीएसपी मेरठ प्रशासन पर आरोप किसी हद तक सही पाए गए। आरोप है कि इस मामले में एनपीएसपी यूनिट के मेरठ में तैनात अधिकारियों की हठधर्मिता के चलते कुछ मॉनिटर्स को घर बैठा दिया गया। हालांकि अब यह मामला स्थानीय कोर्ट में विचाराधीन है।

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