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Monday, April 27, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में ज्ञान का गौरवशाली क्षण, 80 वर्षीय शोधार्थी सहित 115 को मिली पीएचडी उपाधि



 नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिक्षाशोध और उपलब्धियों का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिलाजब विश्वविद्यालय ने 115 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में सबसे अधिक आकर्षण 80 वर्षीय शोधार्थी कर्नल (डॉ.) नरेश कुमार गोयल रहेजिन्हें उनकी उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि पर विशेष सम्मान मिला।  


कर्नल (डॉ.) नरेश कुमार गोयल को उनके शोध विषय मेरठ शहर की मलिन बस्तियों में कचरा बीनने वाले लोगों पर : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने अपना शोधकार्य प्रोफेसर डॉ. सरताज अहमद के निर्देशन में सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इस शोधकार्य को समाज के वंचित वर्गों के जीवनचुनौतियों और सामाजिक परिस्थितियों पर एक महत्वपूर्ण अकादमिक अध्ययन माना जा रहा है। दीक्षांत समारोह में आचार्य देवव्रतगुजरात के महामहिम राज्यपालकुलाधिपति डॉ. स्तुति कक्कड़,  मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राजकुलपति  प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मासुभारती विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेज. जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल  तथा ने उन्हें उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। इसी क्रम में सुश्री सिवली हीरा ने भी प्रोफेसर डॉ. सरताज अहमद के निर्देशन में अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया। उनका शोध विषय पश्चिम बंगाल में महिलाओं द्वारा संचालित अति लघु व्यवसायों पर डिजिटल साक्षरता का प्रभाव : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” रहाजिसमें महिला उद्यमिता और डिजिटल जागरूकता के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया।


इस गौरवपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राजडायरेक्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. वैभव गोयल भारतीयफैकल्टी ऑफ सोशल साइंस के डीन डॉ. सुधीर कुमार त्यागीविभागाध्यक्ष डॉ. तारकनाथ प्रसाद सहित डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठीडॉ. प्रभात कुमारडॉ. राहुल बंसल एवं डा. पवन पाराशर समेत विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षा और शोध के लिए आयु कोई सीमा नहीं होती। 80 वर्षीय शोधार्थी को पीएचडी उपाधि मिलना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गयावहीं अन्य शोधार्थियों की उपलब्धियों ने विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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