Breaking

Your Ads Here

Monday, March 9, 2026

क्या सब कुछ UPSC ही है?


नित्य संदेश। UPSC में करीब 1000 पद होते हैं, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या लगभग दस लाख होती है और परीक्षा में करीब पाँच लाख लोग बैठते हैं। 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में 13.4 लाख प्रतियोगी बैठे थे। जो पास होते हैं, जरूरी नहीं कि उन्हीं में सबसे अधिक प्रतिभा हो इसमें कुछ हद तक chance factor भी होता है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं स्वयं IRS में रहा हूँ।

फाइनल रिजल्ट के बाद हजारों प्रतियोगी ऐसे रह जाते हैं जो उतने ही तेज और बुद्धिमान होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोग परीक्षा देते हैं कि लगभग पचास हजार लोग समान रूप से काबिल हो सकते हैं। UPSC पास न कर पाने पर मैंने हजारों युवाओं को कुंठा, निराशा और डिप्रेशन का शिकार होते देखा है। वे असफल होने से उतना प्रभावित नहीं होते जितना कि सफल होने वालों का मीडिया, कोचिंग सेंटर और समाज द्वारा किया गया महिमामंडन उन्हें प्रभावित करता है। सोशल मीडिया भी ऐसे पोस्टों से भरी रहती है।

जो पास नहीं हो सके उन्हें जीने नहीं दिया जाता। कई सप्ताह तक स्वागत और बधाइयाँ चलती रहती हैं। जाति के लोग अलग से गौरव गाथा गाने लगते हैं। जितनी अधिक पब्लिसिटी होगी, उतना ही असफल युवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और वे सोचने लगेंगे कि उनमें काबिलियत नहीं है। घर वाले भी दबाव डालते हैं। दोस्त और रिश्तेदार कन्नी काटने लगते हैं। सुंदर पत्नी और बड़े दहेज के सपने भी टूट जाते हैं। लोग ताने मारते हैं और जो साथ में तैयारी कर रहे होते हैं उनके व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है।

मैंने दर्जनों मामले देखे हैं जहाँ अधिक प्रतिभाशाली साथी UPSC नहीं निकाल पाते, जबकि अपेक्षाकृत औसत लोग सफल हो जाते हैं। इतनी महिमा-मंडन और शोर-शराबे की आवश्यकता नहीं है। इससे असफल युवाओं पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है। UPSC पास करने वाले कौन सा बहुत बड़ा काम कर देते हैं? वे कौन सा नया आविष्कार कर रहे हैं?

डॉक्टर, इंजीनियर और MBA करने वाले भी UPSC के पीछे क्यों भागते हैं? वेतन भी बहुत अधिक नहीं होता। जब उनसे पूछा जाता है तो जवाब लगभग एक जैसा होता है देश की सेवा का मौका मिलेगा। लेकिन कौन सी सेवा करने जा रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

अगर ब्यूरोक्रेट वास्तव में सेवा करना चाहते तो नेताओं के सामने क्यों झुक जाते हैं? उनकी रीढ़ की हड्डी कहाँ चली जाती है? ज्यादातर लोगों को अच्छी पोस्टिंग चाहिए। अगर दस प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी भी पोस्टिंग के लालच को छोड़ दें तो नेता कुछ नहीं कर सकते।

जब मेरी पहली पोस्टिंग गाजियाबाद में सहायक आयकर आयुक्त के पद पर हुई, तो विभाग के कई कर्मचारियों और अधिकारियों ने सलाह दी कि यहाँ माहौल बहुत खराब है। पंगा लेने से क्या फायदा? जो चल रहा है, उसे चलने दो।लेकिन मैंने सोचा कि सरकार मुझे वेतन, अधिकार और इतना सम्मान देती है, तो उसके बदले मुझे भी कुछ देना चाहिए। उस समय गाजियाबाद में अपराध चरम पर था और इनकम टैक्स अधिकारियों पर हमले भी हो चुके थे। मैंने अपनी पहल पर रेड करना शुरू किया और किसी के दबाव में नहीं आया, भले ही कुछ लोग मुझे “गब्बर सिंह” कहने लगे थे।

असफल युवाओं से मैं यही कहना चाहूँगा कि दुनिया में करने के लिए बहुत कुछ है। जीना जरूरी है और खुद को पहचानना भी जरूरी है। खुश रहने के कई आयाम हैं।समय कभी नहीं रुकता। जो आज सफल हो जाते हैं, वे भी कुछ समय बाद निराशा और हताशा भरी जिंदगी जीने लगते हैं। बीपी, ब्लड शुगर, हार्ट की समस्याएँ और डिप्रेशन का शिकार होना आम बात है।

कहने का अर्थ यह है कि जिंदगी जीने के लिए होती है, कुछ करने के लिए होती है। समाज क्या सोचता है या क्या कहता है, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

डॉक्टर उदित राज 

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here