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Monday, March 9, 2026

देवनागरी महाविद्यालय में “जन संवाद : प्रकृति संरक्षण – जीवन रक्षण” कार्यक्रम आयोजित


तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ। देवनागरी महाविद्यालय में जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रदूषण निवारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से “जन संवाद : प्रकृति संरक्षण ,जीवन रक्षण” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

यह कार्यक्रम चन्द्रासन प्रकृति फाउंडेशन तथा गीता एजुकेशनल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जल संरक्षण के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाने वाले श्री राजेंद्र सिंह मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.एस. यादव, उप सचिव संजीवेश्वर प्रकाश त्यागी, अजय मोहन, प्रभात कुमार और आर.के. भटनागर सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया।

इस अवसर पर “धरती के ध्वजधारी” (उपन्यास) का पुस्तक विमोचन भी किया गया, जिसमें उपस्थित अतिथियों ने साहित्य और समाज के संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है और प्रकृति संरक्षण जैसे विषयों को साहित्य के माध्यम से भी जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्य वक्ता राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में जल संरक्षण के महत्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि जल, जंगल और जमीन को सुरक्षित नहीं रखा गया तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सूख चुकी नदियों और जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।

राजेन्द्र सिंह ने राजस्थान के अलवर क्षेत्र में वर्षों तक काम करते हुए सैकड़ों जोहड़ और तालाबों का पुनर्निर्माण कराया, जिसके परिणामस्वरूप कई सूखी नदियां फिर से बहने लगीं। जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के कारण उन्हें “जल पुरुष” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने देशभर में जल बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया और सामुदायिक जल प्रबंधन का सफल मॉडल प्रस्तुत किया।

उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए छोटे-छोटे प्रयास शुरू करें। उनका कहना था कि प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन की रक्षा है और यह जिम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, विद्यार्थी तथा नॉन-टीचिंग स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संकल्प लिया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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