तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। आवास विकास परिषद की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अधिकारियों के तबादले होते रहे, साल बदलते रहे, लेकिन विभाग में पिछले करीब 15 वर्षों से तैनात बाबू चमन आज भी वहीं बने हुए हैं। यह बात स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि लगातार अधिकारियों के बदलने के बावजूद बाबू का स्थान नहीं बदला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी निर्माण की सूचना सबसे पहले बाबू चमन को ही लगती है। नोटिस चस्पा करना हो या अवैध निर्माण पर लाल निशान लगाना, इन सभी कार्यों की जिम्मेदारी अक्सर उन्हीं के माध्यम से निभाई जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों से एक ही स्थान पर उनकी तैनाती क्यों बनी हुई है। वहीं व्यापारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यवाही में भेदभाव भी देखने को मिलता है।
आरोप है कि जब एक्सियन आफताब अहमद तैनात थे, उस समय सेक्टर-7 से 13 तक कई अवैध निर्माण खुलेआम बन गए और दुकानें बनकर बिक भी गईं। 140/9 और 9/10 जैसे स्थानों पर निर्माण होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत 2/1 पर सील की कार्रवाई हुई और 661/6 पर ध्वस्तीकरण किया गया। इतना ही नहीं, जैना ज्वेलर्स जैसे कई शोरूम को भी नोटिस दिए गए थे। बाद में जब आफताब अहमद का तबादला हुआ और नए एक्सियन अभिषेक राज आए, तब भी कार्यवाही को लेकर सवाल उठते रहे।
हापुड़ रोड पर एक कॉम्प्लेक्स की सीढ़ियां तोड़ी गईं और 14/11 पर वली मोहम्मद नामक व्यक्ति का मकान ध्वस्त कर दिया गया। लेकिन आरोप है कि शास्त्री नगर के 239/1, 651/6 और 533/6 जैसे कई अवैध निर्माणों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में स्थानीय लोगों और व्यापारियों का सवाल है कि आखिर कार्रवाई में यह भेदभाव क्यों दिखाई देता है और वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात बाबू की भूमिका को लेकर भी अब चर्चा तेज हो गई है।
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