नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। कनोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना सत्र 2025- 26 के चौथे एवं अंतिम एकदिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। चौथे एकदिवसीय शिविर के अंतर्गत स्वयंसेविकाओं को राजकीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, मेरठ भ्रमण हेतु ले जाया गया।
राजकीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के केयरटेकर हरिओम शुक्ला ने स्वयंसेविकाओं को बताया कि आजादी के लिए जो क्रांति की शुरुआत हुई थी वो मेरठ से ही हुई थी. इसीलिए मेरठ को क्रांतिधरा के नाम से भी जाना जाता है। भ्रमण का उद्देश्य स्वयंसेविकाओं को प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान के प्रदर्शन एवं उनसे जुड़ी सामग्रियों, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं एवं संस्मरणों, जीवनगाथाओं से अवगत कराना था। इसके माध्यम से स्वयं सेविकाओं ने 1857 की क्रांति में क्रांति के उद्गम स्थल मेरठ शहर के योगदान एवं उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में आजादी के लिए हुए संघर्ष के विषय में ज्ञान प्राप्त किया।
1857 की क्रांति के प्रमुख नेताओं में रानी लक्ष्मीबाई (झांसी), तात्या टोपे, कुंवर सिंह (बिहार), बहादुर शाह जफर (दिल्ली), बेगम हजरत महल (लखनऊ), और नाना साहेब (कानपुर) शामिल थे। इन वीरों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशव्यापी संग्राम का नेतृत्व किया। शिविर में कार्यक्रम अधिकारी डॉ पूजा राय तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की समस्त स्वयंसेविकाएं मौजूद रही। शिविर के आयोजन में श्री संजीव महेश्वरी एवं श्री सुरेश चंद्र प्रजापति का प्रमुख योगदान रहा।

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