नित्य संदेश। हमारी भारतीय संस्कृति में नारी को आदिशक्ति स्वरूपा माना जाता है, परंतु आधुनिक भारत में इस शक्ति को नीतिगत और सामाजिक न्याय दिलाने का वास्तविक कार्य पिछले एक दशक में धरातल पर अधिक स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने लगा है। आज जब हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं, तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित विभिन्न भाजपा शासित राज्यों में महिला सशक्तिकरण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया गया है। केंद्र सरकार ने पुरानी परिधियों को तोड़कर महिलाओं के नेतृत्व और विकास को अधिक सुदृढ़ किया है। 2026 के इस दौर में भारत की बेटियां केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र की भाग्य विधाता बनकर उभर रही हैं।
सुरक्षा व आवागमन की सुलभता :-
आधी आबादी के लिए भयमुक्त समाज की स्थापना करना, प्रगति की पहली अनिवार्य शर्त है। सरकार ने सुरक्षित वातावरण हेतु विभिन्न प्रांतों में जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कठोर नकेल कसी है। विशेषतः उत्तर प्रदेश, जो एक दशक पूर्व महिलाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील समझा जाता था, वहां योगी सरकार का मिशन शक्ति अभियान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वही एंटी रोमियो स्क्वाड, पिंक बूथ और महिला बीट अधिकारियों की तैनाती ने सुरक्षा की नई परिभाषा गढ़ी है। सखी केंद्र (वन स्टॉप सेंटर) के माध्यम से पीड़ित महिलाओं के लिए त्वरित न्याय और सहायता सुनिश्चित की जा रही है। सुरक्षा के साथ-साथ सुगम आवागमन के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में रक्षाबंधन और भाई दूज जैसे पर्वों पर निःशुल्क बस यात्रा और कई राज्यों में महिलाओं के लिए वार्षिक रियायती पास की सुविधा भी है। इससे न केवल महिलाओं की गतिशीलता बढ़ी है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर उनकी उपस्थिति और आत्मविश्वास में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
आर्थिक स्वावलंबन व उत्तम स्वास्थ्य की योजनाएं :-
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता ही वास्तविक सशक्तिकरण का आधार है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य और समय की रक्षा की है। वहीं पीएम मुद्रा योजना द्वारा वितरित ऋणों में से 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं को मिलना इस बात का प्रमाण है कि नारी शक्ति अब स्वयं उद्यमी बन रही है। ड्रोन दीदी तथा लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आधुनिक तकनीक और व्यापार से जोड़ दिया है। मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र में लाडकी बहण योजना, उत्तर प्रदेश में महिला सामर्थ्य योजना, यूपी भाग्य लक्ष्मी योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना (विधवा पेंशन), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और सखी योजना ने सीधे बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचाकर महिलाओं को परिवार में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का मालिकाना हक महिलाओं को देकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा का सबसे बड़ा उपहार दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने इज्जत घर ने महिलाओं की गरिमा और निजता की रक्षा की है।
राजनैतिक नेतृत्व व नीति निर्धारण में भागीदारी :-
सरकार ने महिलाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रोत्साहित किया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 है, जिसने लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। संगठन और सत्ता, दोनों स्तरों पर महिला नेतृत्व को निरंतर बढ़ावा दिया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हों या मध्य प्रदेश और राजस्थान के हालिया चुनाव, भाजपा ने रिकॉर्ड संख्या में महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा और उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालयों का उत्तरदायित्व सौंपा। स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रतीक है कि अब गांव की चौपाल हो या संसद की दहलीज, हर जगह महिलाओं का स्वर मुखर है। श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का राष्ट्रपति पद तक पहुंचना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आज भारत में एक साधारण पृष्ठभूमि की महिला भी सफलता के सर्वोच्च शिखर को छू सकती है।
भविष्य की आधारशिला :- सुकन्या समृद्धि और शिक्षा
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के मंत्र ने समाज की पुरातन मानसिकता को जड़ से बदला है। इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों बेटियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्रवृत्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण ने बेटियों को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया है। आज महिलाएं विज्ञान अनुसंधान, चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासनिक क्षेत्र, कृषि तथा रक्षा क्षेत्र में महत्ती भूमिका निभा रही हैं। हमारी बेटियां अग्निपथ योजना के माध्यम से सेना में भर्ती हो लड़ाकू विमान उड़ाकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ये समन्वित योजनाएं आज एक ऐसे न्यू इंडिया का निर्माण कर रही हैं जहां नारी शक्ति का सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन सर्वोपरि है।
आज की नारी अपनी परंपराओं और देहरी के मान को सुरक्षित रखते हुए सपनों की ऊंची उड़ान भर रही है। डबल इंजन की सरकार ने अपनी नीतियों के माध्यम से जो विश्वास महिलाओं में जगाया है, वह विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि का सबसे बड़ा आधार बनेगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह स्पष्ट है कि जब देश की नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र का सर्वांगीण उत्कर्ष संभव है।
नारी मर्यादा की देहरी तो, हौसले की उड़ान भी है,
उसके हाथों में सुरक्षित, विकसित हिंदुस्तान भी है।
लेखिका
- सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

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