नित्य संदेश। इस शाश्वत सनातन सृष्टि के सृजन का प्रथम दिवस । अनेक मंगल प्रसंगो से परिपूर्ण दिवस । कालगणना के क्षेत्र में हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का परिचायक दिवस ।
यह हमारा वर्ष प्रतिपदा पर्व,
आप सभी के लिए मंगल मय हो ।
वर्ष प्रतिपदा
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आओ,
नव नूतन संवत्सर ,
स्वर्णिम स्वप्न
लिये अंजुरि भर
ऋतु अनुकूल ,
पवन मधुपूरित ।
नवल धान्य
बिखरा धरती पर ।
आओ नव *******
पाद्य , अर्घ्य
और आचमनीय से
अभिनंदन है
नवल दिवाकर।
आगत और
विगत कल दोनों
पुष्प वृष्टि
करते जगती पर ।
अनचीन्ही
स्मित रेखा से ,
अभिसिंचित
रक्तिम मधुराधर ।
ऋतुओं का
सम्राट आ रहा
बिछा हुआ
पथ पर पाटम्बर ।
आओ नव ****** 1
शीत शिशिर
उन्मेष मिट रहा ।
हिम का
ठिठुरा वेश
फट रहा ।
शुष्क ठूंठ
निर्पत्र वृक्ष का
नव किसलय से
गात पट रहा ।
मधुमासी रवि की
यह ऊष्मा
मन को लगती
कितनी सुखकर ?
आओ नव ****** 2
तन और मन
दोनों उन्मद हैं ।
लास वारुणि
पूरित नद हैं ।
कंठ कंठ में
मुखरित , गुंजित ,
रति अनंग के
प्रेम छंद हैं ।
खोज रहा ,
मुकुलित कलिका को ,
गुन गुन करता
भ्रमित भ्रमर ।
आओ नव ******* 3
शीत जड़ित
जड़ चेतन सारे ,
इस ऋतु में
सक्रिय लगते हैं ।
अवगुण्ठन और
नीरसता के
आडंबर
निष्क्रिय लगते हैं ।
शक्ति संचयन के
सब उपक्रम
सार्थक , हितकर
प्रिय लगते हैं ।
नव स्फूर्ति
जगाती निशि दिन ,
पृकृति स्वयं
औषधियां बन कर ।
आओ नव ****** 4
खेत विपणि ,
नव साज ,सज रहे ।
मन मृदंग ,
उन्मत्त बज रहे ।
द्वेष क्लेश को
मिटा, हृदय में
अनुरागी आलाप
रंज रहे ।
रुष्ट प्रेयसी के
कपोल से
छलक रही
ब्रीड़ा , अति मनहर ।
आओ नव ****** 5
चैत्र मास की
वर्ष प्रतिपदा ,
कितने
शुभ संदर्भों वाली ।
बीजा रोपण
आर्य , संघ का
चेटिचंड की
रीत निराली ।
राज्यारोहण
राम प्रभु का
प्रथम दिवस यह
सृष्टि सत्र का ,
दिग् दिगन्त
दीपित दीवाली ।
सकल सृष्टि में
अनुनादित हैं
सृष्टि सृजन के
शाश्वत अक्षर ।
आओ नव ******* 6
मैं
आर्य स्वयं सेवक
जीवन
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