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Wednesday, March 11, 2026

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के तीसरे दिन 'शैवाल' और 'मेटाबोलॉमिक्स' पर हुई गहन चर्चा



नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित 'शैवाल के पृथक्करण, शुद्धिकरण, खेती और मूल्यवान उत्पादों के निष्कर्षण' विषय पर सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हाइब्रिड प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान के नए आयामों पर प्रकाश डाला। 

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग और यूजीसी-एमएमटीटीसी, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। आज के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. आर.एस. पांडे और डॉ. रामा कांत ने की। सत्र के मुख्य वक्ता, वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय मलिक ने 'शैवाल नामकरण: पारंपरिक से फाइलोगेनेटिक तक' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों ने शैवाल के वर्गीकरण और पहचान को और अधिक सटीक बना दिया है। 

इसी सत्र के दूसरे महत्वपूर्ण व्याख्यान में प्रोफेसर जय श्री रावत ने 'मेटाबोलॉमिक्स' विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने समझाया कि मेटाबोलॉमिक्स तकनीक के माध्यम से शैवाल के भीतर होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं और उनसे प्राप्त होने वाले लाभकारी तत्वों की पहचान कैसे की जा सकती है, जो चिकित्सा और खाद्य उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। द्वितीय सत्र में मलेशिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया से जुड़ी वरिष्ठ प्रवक्ता स्ज़े वान पुंग ने ऑनलाइन माध्यम से 'मॉलिक्यूलर टूल्स' द्वारा सूक्ष्म शैवाल की पहचान करने की अत्याधुनिक विधियों के बारे में बताया। 

इसके उपरांत गलगोटिया विश्वविद्यालय के मुकुल शर्मा ने 'स्पिरुलिना की खेती: युवा उद्यमियों के लिए एक स्थायी अवसर' विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए इसे भविष्य का एक लाभदायक स्टार्टअप बताया। दोपहर के सत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रोफेसर मुकेश कुमार ने प्रतिभागियों को 'साइनोबैक्टीरिया' की सूक्ष्मदर्शी पहचान का अभ्यास कराया। वहीं, एमिटी यूनिवर्सिटी, गुडगाँव, हरियाणा के शोधछात्र इन्जीनियर कुंतल शर्मा और पतंजलि ग्रामोद्योग, हरिद्वार के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सलाहकार डा. आर.एस. पांडेय ने सूक्ष्म शैवाल एवं स्पिरुलिना कल्चर के लिए 'रेसिपी प्रिपरेशन' की बारीकियां सिखाईं। 

दिन के अंतिम चरण में डॉ. एच.एम. शुक्ला द्वारा सूक्ष्म शैवाल के शुद्ध कल्चर को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकांत ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल शोधार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायक है, बल्कि स्वरोजगार की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार, डा• भावना बाजपेयी, डॉ. ईश्वर सिंह, डॉ. सुशील कुमार सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, प्रो• अशोक कुमार चौबे, शोध छात्र और देश-विदेश के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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