नित्य संदेश ब्यूरोमेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है। विभाग के प्राध्यापक प्रो. संजीव कुमार शर्मा एवं उनकी शोध टीम मनीषा शर्मा, दीपक कुमार तथा प्रो. संगीता शुक्ला ने विश्व के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका मैटेरियल्स टुडे फिजिक्स (इंपैक्ट फैक्टर : 10) में अपना एक शोध लेख तथा एक विस्तृत समीक्षा लेख प्रकाशित कर विश्वविद्यालय का नाम वैश्विक पटल पर गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि न केवल भौतिकी विभाग, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला द्वारा शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया नैतिक सहयोग एवं आवश्यक सुविधाएँ इस सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला रही हैं।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती के समाधान की दिशा में कदम
प्रो. शर्मा एवं उनकी टीम का यह शोध “क्वांटम हेटरोस्ट्रक्चर्ड उत्प्रेरक पदार्थों द्वारा चयनात्मक बहु-कार्बन हरित उत्पादों का निर्माण” विषय पर आधारित है। वर्तमान समय में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या को देखते हुए यह अध्ययन अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। विश्व स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा पृथ्वी के तापमान में वृद्धि का प्रमुख कारण बन रही है। ऐसे में इस गैस को केवल समस्या के रूप में न देखकर उसे उपयोगी रसायनों, स्वच्छ ईंधनों और औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रो. शर्मा की शोध टीम वर्ष 2012 से कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हरितगृह गैसों के रचनात्मक उपयोग पर सतत कार्य कर रही है।
कार्बन डाइऑक्साइड से बहु-कार्बन हरित उत्पादों का निर्माण
प्रकाशित शोध लेख में उन्नत क्वांटम-आधारित उत्प्रेरक सामग्रियों के विकास और उनके व्यवहारिक उपयोग का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इन विशेष हेटरोस्ट्रक्चर्ड सामग्रियों की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड को उच्च-मूल्य वाले बहु-कार्बन रसायनों और ईंधनों में परिवर्तित करने की संभावनाओं को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है। यह शोध हरित रसायन विज्ञान और सतत ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है। इससे भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करने तथा औद्योगिक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विस्तृत समीक्षा लेख की विशेषताएँ
टीम द्वारा प्रकाशित समीक्षा लेख अपनी व्यापकता और ऐतिहासिक दृष्टिकोण के कारण विशेष महत्व रखता है। इसमें—
संक्रमण धातु डाइकाल्कोजेनाइड्स, ग्राफाइटिक कार्बन नाइट्राइड, धातु-कार्बनिक ढाँचे, सहसंयोजक कार्बनिक ढाँचे, षट्कोणीय बोरॉन नाइट्राइड तथा परतदार द्विधात्विक हाइड्रॉक्साइड आधारित हेटरोस्ट्रक्चर्ड उत्प्रेरक तंत्र का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। कार्बन डाइऑक्साइड रूपांतरण के विद्युत-रासायनिक, प्रकाश-उत्प्रेरक, प्रकाश-विद्युत-रासायनिक तथा जैविक मार्गों की यांत्रिक समझ प्रस्तुत की गई है। द्वि-आयामी सामग्रियों के सैद्धांतिक आधार और उनके द्वारा हरित उत्पाद निर्माण की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। औद्योगिक स्तर पर उपयोग, दीर्घकालिक स्थिरता, विस्तार क्षमता तथा भविष्य की चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह पहली व्यापक समीक्षा है, जिसमें वर्ष 1902 से 2050 तक की ऐतिहासिक समयरेखा, नवीन अनुसंधान प्रवृत्तियाँ, तंत्र संबंधी विश्लेषण तथा व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सशक्त हुआ शोध
इस शोध कार्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चेक गणराज्य, दक्षिण कोरिया तथा डेनमार्क के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया गया। हाल ही में शोधार्थी दीपक कुमार ने दक्षिण कोरिया में प्रोफेसर जोंग सुंग यू के मार्गदर्शन में विभिन्न उन्नत प्रौद्योगिकियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहाँ उन्होंने कार्बन डाइऑक्साइड न्यूनीकरण की नवीन विधियों का अध्ययन किया। वहीं मनीषा शर्मा पिछले दो वर्षों से कार्बन डाइऑक्साइड कमी पर निरंतर कार्य कर रही हैं। इस विषय पर उनका यह दूसरा शोध लेख है। इससे पूर्व वर्ष 2025 में उनका शोध मैटेरियल्स टुडे सस्टेनेबिलिटी (प्रभाव कारक 7.8) में प्रकाशित हो चुका है।
पर्यावरण सुधार की दिशा में अन्य उपलब्धि
उल्लेखनीय है कि प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने पिछले तीन महीनों में इसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में दूसरा शोध लेख प्रकाशित किया है। इससे पूर्व उन्होंने टाइटेनियम डाइऑक्साइड-रजत प्रकाश-उत्प्रेरक में रजत आयन और रजत धातु की संयुक्त भूमिका पर शोध प्रकाशित किया था, जिससे मिश्रित रंग प्रदूषकों के सौर प्रकाश द्वारा अपघटन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार सिद्ध हुआ। यह कार्य पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
सतत विकास की ओर मजबूत कदम
यह शोध केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत ऊर्जा ढाँचे में इन सामग्रियों के एकीकरण की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है। इससे भविष्य में स्वच्छ ईंधन, मूल्यवान रसायनों तथा पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक उत्पादों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रो. संजीव कुमार शर्मा के अनुसार उनकी शोध टीम का उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड को समस्या से समाधान में परिवर्तित करना है। विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर शोध टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान की अकादमिक उत्कृष्टता का प्रतीक बताया है।
इस शोध कार्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चेक गणराज्य के प्रोफेसर रुपेन्द्र शर्मा, दक्षिण कोरिया के प्रोफेसर जोंग सुंग यू, डेनमार्क के प्रोफेसर योगेन्द्र कुमार मिश्रा तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला जी का मार्गदर्शन एवं महत्वपूर्ण योगदान इस उपलब्धि में विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। इनके सहयोग एवं प्रेरणा से यह शोध वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सका।
यह अध्ययन केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सतत ऊर्जा ढाँचे में इन सामग्रियों के एकीकरण की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है। इससे भविष्य में स्वच्छ ईंधन, मूल्यवान रसायनों तथा पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक उत्पादों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रो. संजीव कुमार शर्मा के अनुसार उनकी शोध टीम का लक्ष्य वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से CO₂ को समस्या से समाधान में परिवर्तित करना है। प्रोफेसर संजीव शर्मा ने पिछले 3 महीनों में मैटेरियल्स टुडे फिजिक्स में यह दूसरा आर्टिकल पब्लिश किया है।
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