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Tuesday, March 24, 2026

‘ग्रोथ, इक्विटी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट: 21वीं सदी में चुनौतियाँ एवं अवसर’ शीर्षक पर हुई अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

 



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अर्थशास्त्र विभाग में ‘ग्रोथ, इक्विटी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट: 21वीं सदी में चुनौतियाँ एवं अवसर’ शीर्षक पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ। सत्र का शुभारंभ अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रवेंद्र कुमार शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ। प्रोफेसर संजीव कुमार ने बताया कि आगामी 2 दिनों में विभिन्न विषयों पर कुल 12 सत्रों में लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएँगे।


चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि स्थिरता जैसे पहलुओं को अधिक महत्व देना चाहिए। प्रोफेसर शुक्ला के अनुसार समान वितरण आज प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। यदि ग्रोथ के फल जनता में वितरित न हों तो यह मानवता के विवेक के साथ समझौता करना होगा। विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ अतवीर सिंह ने जोर देकर कहा कि ग्रोथ, इक्विटी, और सस्टेनेबिलिटी कोई दिखावटी शब्द नहीं हैं बल्कि ये हमारे साझा भविष्य के निर्धारक तत्व हैं। ग्रोथ जहां अमीर - गरीब के बीच अंतर को बढ़ाती है, इक्विटी इस अन्तर को कम करती है, और सस्टेनेबिलिटी भविष्य में विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर के प्रोफेसर कन्हैया अहूजा ने सरकार के बढ़ते पूंजीगत व्यय को ग्रोथ में सुधार लाने वाला बताया, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए विशिष्ट निधि, जनसांख्यिकीय लाभांश, संबंधित मुद्दे तथा स्वास्थ्य चिंताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थागत निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा निवेश तथा यूपीआई लेन-देन जैसी तकनीकी प्रगति के माध्यम से सतत विकास की वकालत की।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सुभाष आनंद ने वैश्विक संघर्षों तथा पिछले 175 वर्षों में जनसंख्या के सात गुना वृद्धि पर चर्चा की, जिसके फलस्वरूप खाद्य सुरक्षा तथा स्थिरता के गंभीर मुद्दे उठे। उन्होंने उल्लेख किया कि सतत विकास लक्ष्य 5 - पी ढांचे का अनुसरण करते हैं, जो ग्रोथ-वितरण असंतुलन, जलवायु चुनौतियों तथा अनचाही आपदाओं के जोखिम को रेखांकित करते हैं। इनका मुकाबला करने के लिए उन्होंने वेदों जैसे भारतीय ज्ञान तंत्र की ओर लौटने का आह्वान किया, ताकि संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग सतत विकास सुनिश्चित करे।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ सुरेंद्र कुमार ने महिला श्रम, बल सहभागिता दर (एफएलएफपीआर) को लगभग 26 प्रतिशत बताते हुए चर्चा की, जहाँ 30 वर्ष से अधिक आयु में बेरोजगारी कम हो जाती है, किंतु 15-26 वर्ष समूह में यह 28 प्रतिशत बनी रहती है। उन्होंने हाशिए पर पड़े समूहों के लिए सरकार की नीतियों की आलोचना की, जो कागजों पर अच्छे इरादों वाली हैं किंतु क्रियान्वयन चरणों में विफल हो जाती हैं। प्रोफेसर कुमार ने उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने माल ढुलाई समानीकरण नीति की आलोचना की जो परिवहन में विकृति लाती है—जैसे कोयला परिवहन पर सब्सिडी— तथा गड्ढे-प्रधान ताप विद्युत संयंत्रों की वकालत की, जो सस्ता-साफ बिजली संचरण, स्थानीय रोजगार तथा बेहतर संसाधन आवंटन सुनिश्चित करें, न कि पूंजी तथा श्रम की गतिशीलता पर सब्सिडी दें।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर राजेश रंजन ने वैश्वीकरण के दौर में विज्ञान एवं विकास के एकीकरण पर बल दिया, जहाँ संपूर्ण विश्व एक वैश्विक गाँव बन चुका है तथा ग्रोथ का इंजन है। उन्होंने एआई, एमएल तथा मशीन लर्निंग के माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो संपर्कता एवं उत्पादकता बढ़ाती है, जबकि क्षेत्रीय असमान विकास तथा संसाधन क्षय भारतीय अर्थव्यवस्था को बाधित कर रहे हैं।

पूर्व कुलपति प्रोफेसर एन.के. तनेजा ने छात्रों को आर्थिक ग्रोथ का स्तंभ बताया, जिनका निर्माण उनकी तैयारी पर निर्भर करता है। उन्होंने मुद्रा योजना जैसी दीर्घकालिक सरकारी योजनाओं की सराहना की, जो करोड़ों लोगों को लाभ पहुँचाती हैं तथा हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त बनाती हैं। भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में उन्होंने अनौपचारिक रोजगार—विशेषकर कृषि क्षेत्र में—को सिकोड़ने की वकालत की, ताकि 1991-बाद की उच्च ग्रोथ के लाभ व्यापक रूप से वितरित हों। उन्होंने 80 करोड़ लोगों के लिए राशन जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया तथा वैश्विक युद्ध-जनित संकटों के बीच विदेश नीति की सराहना की।

सत्र का समापन डा. सपना जैन के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। सम्मेलन में प्रोफेसर आर.पी. ममगाँइन, प्रोफेसर युधवीर सिंह त्यागी, प्रो. वीर वीरेंद्र सिंह, डा. भवनीत सिंह बत्रा, प्रभात राय, तथा अनेक अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उद्घाटन के बाद प्लेनेटरी सेशन में प्रोफेसर कन्हैया आज आहूजा द्वारा अध्यक्षता की गई और पैनलिस्ट में प्रक्रिया सुरेंद्र मोर भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय महिला विश्वविद्यालय सोनीपत से पोशाक प्रश्न राज आचार्य त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल से प्रोफेसर आशुतोष प्रिया बरेली विश्वविद्यालय से एवं प्रक्रिया आरपी ममुगेन डॉन विश्वविद्यालय देहरादून से शामिल हुए उन्होंने ग्रोथ इक्विटी और सस्टेनेबिलिटी के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखें लंच के बाद अर्थशास्त्र विभाग में चार समानांतर तकनीकी शब्दों का आयोजन किया गया जिनमें विभिन्न शोधार्थियों द्वारा अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए गए श्याम को अटल सभागार में अर्थशास्त्र विभाग के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रोग्राम की प्रस्तुति दी गई जिसको सभी अतिथियों द्वारा बहुत सराय गया।

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