नित्य संदेश। समाज में कोई भी माध्यम हो, किसी भी स्तर पर गलत प्रचार सामग्री बनाम अश्लीलता को अस्वीकार किया जाना बहुत आवश्यक है, फिर चाहे वो ओटीटी पर परोसी जा रही गंदगी ही क्यों नहीं हो। अभिव्यक्ति की सीमा के नाम पर ऑनलाइन मंच की जवाबदेही तय करना बहुत जरूरी है, वरना हर कोई खुलेआम कुछ भी दिखाएगा। डिजिटल आज़ादी बनाम अश्लीलता पर कार्रवाई ज़रूरी है, और होनी ही चाहिए। फिर वो सरकार करे, अदालत करें या समाज।
आज डिजिटल क्रांति ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में खड़ा कर दिया है। देश में 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और ओटीटी प्लेटफॉर्म का बाजार 2023 में लगभग ढाई अरब डॉलर से अधिक का आँका गया है। सस्ते डॉटा और स्मार्टफोन की पहुंच ने ऐसे में मनोरंजन सहित सब कुछ हर हाथ में पहुँचा दिया है, लेकिन इसी विस्तार के साथ एक गंभीर प्रश्न भी खड़ा हुआ है-क्या डिजिटल स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता को खुली छूट दी जा सकती है ?
हाल ही में केंद्र सरकार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) ने 5 ओटीटी प्लेटफॉर्म को अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री परोसने के आरोप में बंद (ब्लॉक) करने की कार्रवाई की है। इससे पहले भी 2023 में 25 से अधिक ऐप्स और वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह कोई पहली कार्रवाई नहीं थी, क्योंकि 2020 के बाद से ऐसी डिजिटल सामग्री पर निगरानी निरंतर बढ़ी है। फरवरी 2021 में लागू सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 ओटीटी और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म को एक वैधानिक ढांचे में लाया है। इसके तहत तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र और आयु-आधारित वर्गीकरण अनिवार्य किया गया है, इसके बावजूद कुछ प्लेटफॉर्म 'एडल्ट कंटेंट' के नाम पर ऐसी सामग्री परोस रहे थे; जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक मर्यादाओं और कानून की सीमाओं को सीधी चुनौती है।
आज अश्लीलता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना और ऐसी सामग्री को बढ़ावा देना केवल नैतिक बहस का विषय नहीं है; यह सीधे तौर पर आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।
अब बात समस्या के दूसरे पहलू की, तो ओटीटी प्लेटफॉर्म का बड़ा दर्शक वर्ग किशोर और युवाओं का हैं। विभिन्न सर्वेक्षण बताते हैं कि 15–24 वर्ष आयु वर्ग के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या करोड़ों में है। जब बिना पर्याप्त आयु सत्यापन के उत्तेजक और अश्लील सामग्री परोसी जाती है, तो इसका मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव दूरगामी होता है। महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण, संबंधों की समझ और सामाजिक व्यवहार पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, जो परिवार को भी तोड़ता है।
यहाँ एक बात स्पष्ट है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान का अनुच्छेद 19 (1)(a) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन अनुच्छेद 19 (2) इस स्वतंत्रता पर 'उचित प्रतिबंध' की भी अनुमति देता है; विशेषकर जब बात सार्वजनिक शालीनता और नैतिकता की हो। अतः सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को अभिव्यक्ति पर हमला बताना एकतरफा दृष्टिकोण है। यदि कोई मंच या पोर्टल जान-बूझकर कानून की सीमाएँ लांघता है, तो कार्रवाई न केवल उचित बल्कि अत्यंत ही आवश्यक है। फिर भी केवल प्रतिबंध समाधान नहीं है। सरकार की कार्रवाई के साथ वेबसाइट की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। मजबूत आयु-सत्यापन तंत्र, स्पष्ट सामग्री स्वीकरण, सख्त आंतरिक संपादकीय समीक्षा और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई-ये सब अनिवार्य कदम हैं, तभी यह मानसिक कचरा कम किया जा सकता है। दर्शकों को भी अपनी पसंद और जिम्मेदारी समझनी होगी। बाजार वही परोसता है, जिसकी मांग होती है; यदि समाज स्वस्थ मनोरंजन को प्राथमिकता देगा, तो फूहड़ता स्वतः हाशिए पर चली जाएगी।
अश्लील विषय-वस्तु परोसने वालों को यह समझना होगा कि डिजिटल माध्यम अराजकता का मैदान नहीं है। 'व्यूज' और 'सब्सक्रिप्शन' के नाम पर सामाजिक संतुलन बिगाड़ना अल्प काल का लाभ तो दे सकता है, पर दीर्घकाल में कानूनी शिकंजा और सामाजिक बहिष्कार दोनों झेलने पड़ सकते हैं। समझना चाहिए कि कानून का उद्देश्य रचनात्मकता को दबाना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदारी के दायरे में रखना है।
इसलिए सरकार की ऐसी किसी भी कार्रवाई को दमन के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल अनुशासन की दिशा में आवश्यक कदम के नाते देखा जाना चाहिए, क्योंकि गलती की सजा होती है, बहस नहीं। इस तरह के मामलों में सरकार की चेतावनी साफ है-स्वतंत्रता अधिकार है, परंतु अनुशासन उसकी शर्त है। यदि प्लेटफॉर्म स्वनियमन नहीं करेंगे, तो कानून अपना काम करेगा। और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही संतुलन बनाम सख़्ती समाज को स्वस्थ, सुरक्षित और संस्कारित बनाए रखेगी, क्योंकि जो गंदगी आज आप सामने या आसपास देख रहे हो, वो करीब आते और संस्कृति नष्ट होते देर नहीं लगती है।


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