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Saturday, February 28, 2026

बड़ी चुनौती-बढ़ती बेरोज़गारी और युवाओं का भविष्य

 


नित्य संदेश। विश्व में तेजी से अनेक क्षेत्रों में तरक्की करते हुए भारत की जनसंख्या 2026 के हिसाब से लगभग 147 करोड़ के आसपास है। 2026 के विश्व डॉटा के आधार पर स्पष्ट है कि भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है। सरल भाषा में कहें तो आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में गिना जाता है। यह स्थिति हमारे लिए एक बड़ी ताकत भी है और एक गंभीर चुनौती भी। यदि युवाओं को सही दिशा, शिक्षा और रोजगार नहीं मिले, तो यही जनसंख्या लाभ 'जनसंख्या बोझ' में बदल सकता है। यक़ीनन भारत प्रगति कर रहा है, प्रतिष्ठा बढ़ी है, लेकिन वर्तमान समय में भारत के सामने जो सबसे बड़ी और प्रमुख चुनौती है, वह है - बढ़ती बेरोज़गारी और उससे जुड़ी आर्थिक असुरक्षा।

  भारत हर वर्ष लाखों नए युवाओं को कार्यबल में शामिल होते हुए देखता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने के बाद ये युवा नौकरी की तलाश में निकलते हैं, परंतु उपलब्ध नौकरियों की संख्या उनकी तुलना में कम है। इसका परिणाम- योग्य और शिक्षित युवाओं का भी रोजगार से वंचित रहना है। कई बार उन्हें अपनी योग्यता से कम स्तर का कार्य स्वीकार करना पड़ता है, जिससे उनकी क्षमता का सही उपयोग नहीं हो पाता है।

    इस बेरोज़गारी का प्रभाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी हो रहा है। जब किसी युवा को लंबे समय तक रोजगार नहीं मिलता, तो उसमें निराशा, तनाव और असंतोष बढ़ने लगता है। परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। कई बार यह स्थिति अपराध, नशे या सामाजिक अशांति को भी जन्म दे सकती है। इसलिए यह राष्ट्रीय स्थिरता से जुड़ा प्रश्न है।
 विश्लेषण करने पर मालूम होता है कि इस समस्या के कई कारण हैं। पहला कारण है-शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल की कमी। हमारे यहाँ बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा हैं, परंतु उनके पास उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल (स्किल) नहीं होता है, जबकि सरकार इस दिशा में काम कर रही है। दूसरा कारण है-कृषि पर अत्यधिक निर्भरता। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, परंतु खेती से पर्याप्त आय नहीं मिलती। तीसरा कारण है- छोटे और मध्यम उद्योगों की सीमित वृद्धि, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर सकते थे।

   सरकार ने इस दिशा में कई प्रयास किए हैं। जैसे 'स्किल इंडिया मिशन' के माध्यम से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की पहल की गई। 'मेक इन इंडिया' के जरिए विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का प्रयास हुआ। 'प्रधानमंत्री मुद्रा योजना' ने छोटे उद्यमियों को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया। ये प्रयास वाकई सराहनीय हैं, पर इनके प्रभाव को और व्यापक तथा जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने की महती आवश्यकता है।

इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ ठोस सुझाव आवश्यक हैं, जिन पर कामना करना होगा। सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा और कौशल आधारित पाठ्यक्रम अनिवार्य किए जाएं। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधा सहयोग स्थापित किया जाए, ताकि पढ़ाई पूरी करते ही युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।

दूसरा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए। इन उद्योगों को सस्ती बिजली, सरल ऋण प्रक्रिया और कम कागजी कार्यवाही जैसी सुविधाएं मिलें। यदि छोटे उद्योग मजबूत होंगे, तो स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होंगे।
   तीसरा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए। कृषि के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाए। इससे गाँवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम होगा। चौथा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्ट-अप संस्कृति को और मजबूत किया जाए। आज का युवा नवाचार करना चाहता है। यदि सरकार तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करे, तो अनेक नए उद्यम शुरू हो सकते हैं। इससे रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले युवा तैयार होंगे।

  आज के हालातों में यह समझना होगा कि बेरोज़गारी मिटाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। निजी क्षेत्र, समाज और स्वयं युवाओं को भी आगे आना होगा। युवाओं को निरंतर सीखने, नई तकनीकों को अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
    यदि भारत अपनी युवा शक्ति को सही दिशा देने में सफल हो जाता है, तो आने वाले वर्षों में वह विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बन सकता है, लेकिन यदि इस चुनौती को नजरअंदाज किया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए समय की मांग है, कि रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और ठोस, दीर्घकालिक नीतियों के माध्यम से युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाया जाए। यही भारत की प्रगति और समृद्धि की सच्ची कुंजी है।

अजय जैन 'विकल्प', मप्र



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