तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्किट के कुछ व्यापारी इन दिनों खुद को चारों ओर से घिरा और लाचार महसूस कर रहा है। तीन दशक से अधिक समय तक कड़ी मेहनत, संघर्ष और समर्पण के बाद अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले व्यापारियों के सामने अब अपने ही बनाए हुए व्यवसाय को ध्वस्त होते देखने की नौबत नजर आ रही है। जिन दुकानों, प्रतिष्ठानों से कुछ परिवारों की रोज़ी-रोटी चलती थी, ओर अब भी चल रही है! आज वहीं प्रतिष्ठान अपनी आँखों के सामने उजड़ता देख रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या व्यापारी वर्ग इतना बड़ा अपराधी बन गया कि उसे अपने ही श्रम का फल छिनते देखना पड़ रहा है? व्यापारी न तो अपराधी हैं, न कानून से परे — वे तो वही लोग हैं जिन्होंने बैंकों से लोन लेकर, दिन-रात 14 से 16 घंटे तक मेहनत कर अपने और परिवारों को भी रोज़गार दिया। मगर आज वही व्यापारी बुढ़ापे में आकर अपने जीवनभर की पूंजी, मेहनत और उम्मीदों को खत्म होते देख रहा है! कभी आर्थिक रीढ़ कहलाने वाला यह वर्ग अब बेबस, असहाय और उपेक्षित महसूस कर रहा है। वर्षों से शहर की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला व्यापारी आज यह सोचने पर मजबूर है — अब क्या होगा
कुछ पर कार्यवाही तो कुछ पर लापरवाही क्यों:
एक सवाल ये भी है ! एक तरफ आवास विकास अधिकारी। सेंट्रल मार्किट शास्त्री नगर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 दिन में खाली करने के नोटिस चस्पा कर रहे है! वही दूसरी तरफ आवास विकास कार्यालय से कुछ दूरी पर ही नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण हो रहे है जिनपर आवास विकास के बाबू जई कुछ ज्यादा ही मेहरबान है।इतना ही नहीं जब सभी दुकानें अवैध तो। चुनिंदा दुकानों पर नोटिस चस्पा क्यों ?
सेक्टर 1 से 13 तक दर्जनों चर्चित निर्माण :
239/1 , , 533/6 , 651/6 , 140/9 ,, 9/10, , 14 /11 सेक्टर 13 आर टी ओ पुल के पार जिनपर आवास विकास अधिकारी मेहरबान!
पुरानो पर कार्यवाही नए पर लापरवाही क्यों:
सोच का विषय ये है छोटी छोटी दुकानों पर नोटिस चस्पा किया गया लेकिन बड़ी बिल्डिंग में बनी दुकानों पर मेहरबानी कही आवास विकास की सेटिंग तो नहीं! अब देखना है क्या आवास विकास अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश सब पर दिखाएंगे या कुछ व्यापारियों पर ही अपनी धाक जमाएंगे:
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