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Saturday, February 21, 2026

आईपीआर जागरूकता सेमिनार का द्वितीय दिवस एवं भव्य समापन समारोह सम्पन्न : नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर गहन मंथन



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में आयोजित दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) जागरूकता सेमिनार का द्वितीय दिवस विज्ञान, प्रौद्योगिकी, साइबर स्पेस तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विविध आयामों पर गंभीर चिंतन-मनन के साथ सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात अटल सभागार में सेमिनार का भव्य समापन समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया।

द्वितीय दिवस के अकादमिक सत्र

दिवस का शुभारंभ डॉ. दिनेश कुमार, प्रोफेसर एवं डीन, अंतःविषयी अध्ययन संकाय, South Asian University (दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय), नई दिल्ली के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने “आईपीआर प्रबंधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान नवाचार-प्रधान युग में वैज्ञानिक प्रगति एवं तकनीकी संसाधन बौद्धिक संपदा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने डिजिटल डाटाबेस, पेटेंट विश्लेषण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र की भूमिका को विस्तार से समझाया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. पंकज कुमार एवं प्रो. ओमकार सिंह ने की तथा डॉ. प्रदीप चौधरी सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।



दूसरे सत्र में डॉ. अमनदीप सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, National Law University (राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय), लखनऊ ने “साइबर स्पेस के युग में आईपीआर से जुड़े मुद्दे” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने ऑनलाइन पायरेसी, डिजिटल उल्लंघन तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा विवादों की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए सशक्त एवं अनुकूलनशील विधिक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. दिनेश कुमार (अर्थशास्त्र विभाग) ने की तथा डॉ. योगेंद्र सिंह एवं डॉ. विनय पंवार सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। तीसरे सत्र में डॉ. विष्णु शंकर, सहायक प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान विभाग, Dayal Singh College (दयाल सिंह महाविद्यालय), University of Delhi (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उसके उपकरणों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध, पेटेंट विश्लेषण, साहित्यिक चोरी की जांच तथा नवाचार को नई गति प्रदान कर रही है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित सामग्री से जुड़े नैतिक एवं विधिक प्रश्नों पर भी उन्होंने विस्तृत चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अजय राज (विधि विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने की तथा प्रो. नितिन गर्ग एवं डॉ. ऋतु बत्रा सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। द्वितीय दिवस के सभी सत्रों ने प्रतिभागियों को डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा प्रबंधन की चुनौतियों एवं संभावनाओं की व्यापक समझ प्रदान की।

भव्य समापन समारोह

अटल सभागार में आयोजित समापन समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अनिल कुमार, माननीय कैबिनेट मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, Government of Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश सरकार) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एम. के. गुप्ता ने की तथा प्रो. बीरपाल सिंह, निदेशक (शोध) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को निम्न पुरस्कार प्रदान किए गए—

प्रथम पुरस्कार : ₹10,000

द्वितीय पुरस्कार : ₹8,000

तृतीय पुरस्कार : ₹5,000

चतुर्थ पुरस्कार : ₹3,000

प्रत्येक प्रतियोगिता में ₹1,000 के पाँच सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए गए।



अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अनिल कुमार ने कहा, “युवा शक्ति ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए युवाओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार स्टार्टअप, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी तथा नवाचारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु प्रतिबद्ध है।”

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार केवल विधिक विषय नहीं, बल्कि नवाचार की सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन हेतु बधाई दी। प्रो. एम. के. गुप्ता ने शोध एवं नवाचार को राष्ट्रीय विकास की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सृजनात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। प्रो. बीरपाल सिंह ने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, शोध उपलब्धियों तथा नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है।


अंत में डॉ. प्रदीप चौधरी, सह-प्राध्यापक, सांख्यिकी विभाग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एस. एस. गौरव ने संगोष्ठी की सफलता का श्रेय कुलपति महोदया के मार्गदर्शन को दिया। यह दो दिवसीय सेमिनार एवं उसका समापन समारोह अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार और रचनात्मक प्रतिभा का प्रेरणादायक उदाहरण सिद्ध हुआ।

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