नित्य संदेश। भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य, उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं अपितु निवेशकों के स्वर्ग के रूप में पहचाना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2014 के पश्चात जो विकास कार्य हुए है उससे वह महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद तीसरा प्रगतिशील प्रदेश बन चुका है। उसकी गति को बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 और 24 फरवरी, 2026 को दो दिवसीय सिंगापुर दौरा एक परिवर्तनकारी यात्रा के रूप में किया।
हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्व सक्रियता नीति (एक्ट ईस्ट विजन) और भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश अब वैश्विक विकास इंजन की भूमिका निभा रहा है। योगी जी का यह दौरा केवल आधिकारिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी ठोस कार्ययोजना है।
दुनिया में सिंगापुर को सबसे बड़ा रसद (लॉजिस्टिक्स) और वित्तीय केंद्र (फाइनेंशियल हब) माना जाता है, इसलिए केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री ने रणनीतिक रूप से इस देश का चयन किया है। उत्तर प्रदेश ने अपनी भौगोलिक स्थिति और प्रचुर संसाधनों के बाद भी लंबे समय तक आधुनिक तकनीक और कुशल प्रबंधन की कमी को झेला है। तभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर के सफल शहरी प्रतिरूप (अर्बन मॉडल) और बंदरगाह आधारित अर्थव्यवस्था (पोर्ट-लेड इकोनॉमी) को उत्तर प्रदेश के चारों तरफ जमीन से घिरे होने की चुनौती के समाधान के रूप में चुना है। भविष्य में सिंगापुर की विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश के अंतर्देशीय जलमार्गों और बहु-विध रसद को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, जिससे यहां का सामान सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेगा।
इस दो दिवसीय सघन प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। राज्य सरकार ने सिंगापुर की दिग्गज कंपनियों के साथ 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। जिनमें से 60,000 करोड़ रुपये के समझौतों पर तो तत्काल हस्ताक्षर हुए हैं। प्रमुख निवेश यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप और गोल्डन स्टेट कैपिटल जैसे वैश्विक समूहों द्वारा किए जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति और पारदर्शी कानून-व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय मुहर लगाते हैं। इस निवेश का सबसे दूरगामी परिणाम ग्रेटर नोएडा के समीप सिंगापुर सिटी का विकास होगा। यह एक ऐसी स्मार्ट सिटी होगी जहां सिंगापुर का सतत नगरीय नियोजन, लंबवत बागवानी, कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीक और सुनियोजित यातायात प्रबंधन लागू किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा में डेटा सेंटर हब का भी विस्तार होगा।
विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दुनिया के सबसे बड़े मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ हब के रूप में विकसित करने के लिए चांगी एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया गया है। इससे भारत के विमानन क्षेत्र को प्रतिवर्ष करोड़ों डॉलर की बचत होगी, जो वर्तमान में विमानों की मरम्मत के लिए विदेशों में व्यय होते हैं। तकनीक के इसी क्रम में लखनऊ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी (एआई सिटी) के रूप में विकसित करने का खाका बनाया है, जो आईटी क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाएगा। वहीं वाराणसी और प्रयागराज में सिंगापुर के मॉडल पर जलमार्गों का आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि जल परिवहन को व्यापार का मुख्य जरिया बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री का मानना है कि केवल निवेश ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस निवेश को संभालने के लिए कुशल कार्यबल भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सिंगापुर के विश्वविख्यात इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के साथ विशेष करार किया गया है। इसके तहत कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां यूपी के युवाओं को रोबोटिक्स, एआई और आधुनिक उत्पादन (मैन्युफैक्चरिंग) की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पूरे दौरे के फलस्वरूप लगभग 70,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है, जिससे युवाओं का पलायन रुकेगा। इसके अतिरिक्त बुंदेलखंड के क्षेत्र में सौर ऊर्जा परियोजनाओं और ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर में निवेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक मानकों पर भी खरा उतरेगा।
दादरी और बोड़ाकी में बहु-साधन रसद पार्क (मल्टी-माॅडल लॉजिस्टिक्स पार्क) का विस्तार माल ढुलाई को सस्ता और तेज बनाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे ने उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच तकनीकी और सांस्कृतिक एकीकरण के नए द्वार भी खोले हैं। इसके तहत यूपी के नगर निकायों में डिजिटल ट्विन और ई-गवर्नेंस को मजबूती मिलेगी, जबकि बुद्ध सर्किट के माध्यम से अयोध्या और काशी जैसे केंद्रों को सिंगापुर के पर्यटकों से जोड़ा जाएगा। साथ ही, सेमीकंडक्टर नीति 2024 के जरिए चिप-निर्माण और ओडीओपी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है, जो प्रदेश की सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई देगी।
अंततः कह सकते है कि योगी आदित्यनाथ का यह सिंगापुर दौरा उत्तर प्रदेश की कार्यप्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की उम्दा व सफल प्रयास है। यह यात्रा सिद्ध करती है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोग करने वाला राज्य नहीं, बल्कि एक उत्पादक महाशक्ति बनने की राह पर है। यदि ये निवेश योजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती हैं, तो उत्तर प्रदेश को भारत की अर्थव्यवस्था का शक्ति केंद्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। यह दौरा उत्तर प्रदेश के आर्थिक स्वावलंबन के इतिहास में दैदीप्यमान मार्ग होगा।
- सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'
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