एनबीपीजीआर, नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, जयपुर में आधुनिक कृषि, संरक्षण एवं विपणन प्रणालियों से हुआ प्रत्यक्ष परिचय
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कृषि संकाय अंतर्गत पादप संरक्षण विभाग द्वारा विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यावहारिक एवं व्यावसायिक ज्ञान को समृद्ध करने के उद्देश्य से एक व्यापक शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस शैक्षिक भ्रमण के अंतर्गत एम.एससी. (कृषि) पादप रोग विज्ञान एवं कीट विज्ञान के कुल 38 विद्यार्थियों ने डॉ. अजय कुमार के नेतृत्व में देश के दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों- राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर), नई दिल्ली तथा सीसीएस राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (सीसीएस–एनआईएएम), जयपुर- का सफलतापूर्वक भ्रमण किया। यह शैक्षिक भ्रमण विभाग की उस सतत पहल का हिस्सा रहा, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में चल रहे अनुसंधान, संरक्षण, प्रबंधन एवं नीति-निर्माण प्रक्रियाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पादप संरक्षण, आनुवंशिक संसाधन सुरक्षा, बीज स्वास्थ्य, जैव-सुरक्षा तथा कृषि विपणन और उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों की व्यावहारिक समझ प्रदान करना था।
शैक्षिक भ्रमण के प्रथम चरण में विद्यार्थियों ने एनबीपीजीआर, नई दिल्ली का भ्रमण किया, जो देश में पादप आनुवंशिक संसाधनों के संग्रहण, संरक्षण एवं सुरक्षा के क्षेत्र में एक शीर्ष राष्ट्रीय संस्था है। संस्थान में विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें पादप आनुवंशिक संसाधन संरक्षण की आवश्यकता एवं उसकी राष्ट्रीय भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। इन सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को बीज स्वास्थ्य प्रबंधन, पादप क्वारंटाइन नियमों, जर्मप्लाज्म में कीट एवं रोगों की पहचान, निदान एवं निगरानी, तथा समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन रणनीतियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वैश्वीकरण के इस दौर में पौधों से संबंधित कीट एवं रोग किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर कृषि को प्रभावित कर सकते हैं और ऐसे में क्वारंटाइन एवं जैव-सुरक्षा उपायों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। विद्यार्थियों को सीड जीन-बैंक संरक्षण प्रणाली, सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी एवं सर्वेक्षण तकनीकों, जैविक नियंत्रण विधियों तथा आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकीय उपकरणों से भी परिचित कराया गया, जिनका उपयोग पादप आनुवंशिक संसाधनों की दीर्घकालीन सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने एनबीपीजीआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं एवं प्रभागों का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें पादप आनुवंशिक संसाधनों के संग्रहण, लक्षण निर्धारण, मूल्यांकन, संरक्षणात्मक उपायों एवं दीर्घकालीन संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई। यह अनुभव विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इससे उनमें अनुसंधान के प्रति रुचि एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित हुआ। विद्यार्थियों ने संस्थान में चल रहे कार्यों को देखकर यह समझा कि किस प्रकार पादप आनुवंशिक संसाधन देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि स्थिरता एवं जैव-विविधता संरक्षण की आधारशिला हैं।
शैक्षिक भ्रमण के दूसरे चरण में विद्यार्थियों ने 13 फरवरी 2026 को जयपुर स्थित सीसीएस–एनआईएएम का भ्रमण किया। यह संस्थान देश में कृषि विपणन, नीति निर्माण, क्षमता विकास एवं कृषि-व्यवसाय प्रोत्साहन के क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां विद्यार्थियों के लिए कृषि विपणन से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को कृषि विपणन प्रणालियों, मूल्य खोज तंत्र, कृषि-व्यवसाय प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, कृषि निर्यात-आयात नीतियों तथा कृषि विपणन सुधारों से संबंधित सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावी विपणन व्यवस्था के बिना किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलना संभव नहीं है, और इसी कारण आधुनिक विपणन प्रणालियों का विकास समय की आवश्यकता बन चुका है। विद्यार्थियों को डिजिटल कृषि विपणन प्लेटफॉर्म जैसे ई-नाम (e-NAM), मूल्य श्रृंखला विकास, कृषि-उद्यमिता के अवसरों तथा आधुनिक विपणन सूचना एवं इंटेलिजेंस प्रणालियों से भी अवगत कराया गया। विशेषज्ञों द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि किस प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी नवाचार कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, बिचौलियों की भूमिका कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने सीसीएस–एनआईएएम के विभिन्न प्रभागों एवं प्रशिक्षण इकाइयों का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें कृषि विपणन अनुसंधान, नीति निर्माण, क्षमता विकास एवं कृषि-व्यवसाय संवर्धन से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों की जानकारी मिली। इस भ्रमण ने विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता की कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित न होकर विपणन, मूल्य संवर्धन और उद्यमिता से जुड़कर ही एक सफल एवं लाभकारी क्षेत्र बन सकती है।
कुल मिलाकर पादप संरक्षण विभाग द्वारा आयोजित यह शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस भ्रमण से विद्यार्थियों को पादप संरक्षण, बीज स्वास्थ्य, जैव-सुरक्षा, कृषि विपणन एवं उद्यमिता जैसे विषयों की समग्र और व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। साथ ही, इस यात्रा ने विद्यार्थियों को भविष्य में अनुसंधान, सरकारी सेवाओं, कृषि उद्योग, स्टार्ट-अप एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से भी परिचित कराया। पादप संरक्षण विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमणों का आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल है, जो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं से जोड़कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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