नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शोभित विश्वविद्यालय परिसर के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ द्वारा प्रबंधन छात्रों के लिए “भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौता ” विषय पर मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। यह सत्र वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों एवं उभरते अवसरों की समझ विकसित करने हेतु विशेष रूप से बी-स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ, डॉ. अभिषेक कुमार डबास द्वारा सत्र के संसाधन वक्ता प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार गुप्ता का पटका पहनाकर स्वागत कर किया गया। इस अवसर पर निदेशक, नाइस स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज, प्रो. विकास गुप्ता उपस्थित रहे। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. अभिषेक कुमार डबास ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत एक “हॉट मार्केट” के रूप में उभर रहा है, और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों की जानकारी प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता 27 जनवरी 2026 को लगभग दो दशकों की लंबी वार्ता के पश्चात संपन्न हुआ है, जिसे विशेषज्ञ “मदर ऑफ ऑल डील्स” की संज्ञा दे रहे हैं। यह समझौता वैश्विक व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति श्रृंखला के नए अवसरों को जन्म देगा।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार गुप्ता ने अपने विस्तृत एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान में मुक्त व्यापार की अवधारणा, इसके लाभ एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि मुक्त व्यापार का अर्थ है—अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर न्यूनतम या शून्य सरकारी प्रतिबंध, जिससे उपभोक्ताओं को कम कीमतों पर बेहतर उत्पाद मिलते हैं, उद्योगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने निर्यात आधारित विकास का उदाहरण देते हुए दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और चीन जैसे देशों की प्रगति का उल्लेख किया तथा बताया कि किस प्रकार निर्यात को बढ़ावा देकर आर्थिक सशक्तिकरण संभव है।
प्रो. गुप्ता ने यूरोपीय संघ की संरचना, उसके सदस्य देशों की भूमिका और भारत–EU व्यापार के बढ़ते आयामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। वस्त्र एवं परिधान, औषधि, आईटी सेवाएं, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। उन्होंने डिजिटल व्यापार, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रवाह, निवेश संरक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की और बताया कि भविष्य के प्रबंधकों को केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को भी समझना आवश्यक है।
सत्र के दौरान समस्त प्रबंधन विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने सक्रिय सहभागिता करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका तथा भविष्य के करियर अवसरों पर अपने प्रश्न एवं विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर नेहा यजुर्वेदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर, डॉ गार्गी चौधरी, डॉ प्रीति गर्ग,राधा,रूपाली कनौजिया एवं छात्र उपस्थित रहे।

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