नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ - शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने जेंडर सेंसिटाइज़ेशन सेल के सहयोग से महिला छात्रों के स्वास्थ्य, सम्मान और सही जानकारी को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्य 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) और लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) के अनुरूप था।
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर एवं गतिविधि समन्वयक डॉ. रागिनी श्रीवास्तव के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत की आवश्यकता, स्वच्छता के महत्व और परिसर में उपलब्ध स्वच्छता सुविधाओं के सही उपयोग के बारे में जागरूकता पर ज़ोर दिया। इसके बाद शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. इंदिरा सिंह ने मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक मिथकों और झिझक को तोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि शिक्षा के माध्यम से युवा महिलाओं में आत्मविश्वास, सुरक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सकता है और छात्राओं को स्वस्थ मासिक धर्म आदतें अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। जागरूकता बढ़ाने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता और स्वास्थ्य से संबंधित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई, जिससे छात्रों को मासिक धर्म के जैविक, सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं की बेहतर समझ मिली।
मुख्य वक्ता डॉ. ममता भारद्वाज (देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार) ने मासिक धर्म के जैविक पहलुओं, प्रजनन स्वास्थ्य में उसके महत्व तथा इस दौरान स्वच्छता, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मासिक धर्म से जुड़े सामान्य मिथकों और गलत धारणाओं को भी दूर किया और वैज्ञानिक सोच तथा सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति संवेदनशील बनाना, सुरक्षित और स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित करना तथा सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इन्सिनरेटर के सही उपयोग की जानकारी देना था। छात्र समन्वयकों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यक्रम सफल और प्रभावशाली रहा।

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