नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ एक ज्ञानवर्धक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं भावी शिक्षकों को समकालीन शिक्षक शिक्षा सुधारों के संदर्भ में की संरचना, उद्देश्यों और महत्व से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारम्भ शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की सहायक आचार्या डॉ. रूपम जैन द्वारा हार्दिक स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने विभिन्न विभागों के आदरणीय डीन एवं प्राचार्यों को माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन हेतु आमंत्रित किया, जिसके पश्चात सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और उत्साह को और बढ़ा दिया।
उद्घाटन के उपरान्त डॉ. रूपम जैन ने शिक्षा संकाय के डीन लेफ्टिनेंट प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार को कार्यक्रम की थीम प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित किया। अपने संबोधन में उन्होंने एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम की दृष्टि एवं उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला, विशेष रूप से बी.एससी. बी.एड. कार्यक्रम पर। उन्होंने बताया कि यह एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम पाठ्यक्रम विषय ज्ञान की मजबूत नींव के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षण दक्षताओं का विकास करता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति एन ई पी 2020 के अनुरूप है। उन्होंने यह भी बल दिया कि चार वर्षीय समेकित कार्यक्रम में प्रारम्भ से ही शिक्षण प्रशिक्षण एवं विद्यालयी इंटर्नशिप का अवसर प्रदान किया जाता है। इसके पश्चात शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. डॉ. इंदिरा सिंह ने एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने कार्यक्रम की अवधि, पात्रता मानदंड एवं प्रवेश आवश्यकताओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पारंपरिक दो वर्षीय बी.एड. कार्यक्रम और चार वर्षीय के मध्य मुख्य अंतर भी स्पष्ट किए। उन्होंने बताया कि जहाँ पारंपरिक बी.एड. स्नातक के पश्चात किया जाता है, वहीं में प्रारम्भ से ही विषय अध्ययन एवं शिक्षक प्रशिक्षण को एकीकृत किया जाता है, जिससे भावी शिक्षकों का समग्र विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने पाठ्यक्रम संरचना पर भी चर्चा की, जिसमें बहुविषयी अध्ययन, व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास एवं शोध अभिमुखता शामिल है। इसके बाद शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय, एस.वी.एस.यू. की सह आचार्या डॉ. मुमताज शेख ने एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के विभिन्न घटकों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने क्रेडिट संरचना, क्षेत्रीय सहभागिता, इंटर्नशिप कार्यक्रम, मूल्यांकन पद्धति एवं दक्षता-आधारित शिक्षण दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
उन्होंने यह भी बताया कि एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम चिंतनशील शिक्षकों का निर्माण करता है, आलोचनात्मक चिंतन कौशल को बढ़ाता है तथा इक्कीसवी वीं सदी के शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों को तैयार करता है। उन्होंने इस कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध करियर अवसरों एवं व्यावसायिक विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यक्रम को और अधिक स्पष्ट एवं प्रभावी बनाने के लिए एक विशेष रूप से तैयार किया गया पॉडकास्ट भी प्रस्तुत किया गया। इस पॉडकास्ट में एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के प्रत्येक पहलू — उसके उद्देश्यों, पाठ्यक्रम संरचना, व्यावहारिक प्रशिक्षण घटकों तथा दीर्घकालिक लाभों — की विस्तृत जानकारी दी गई। इसने सामान्य जिज्ञासाओं का समाधान किया और प्रतिभागियों को कार्यक्रम की स्पष्ट समझ प्रदान की। कार्यक्रम का समापन शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय, एस.वी.एस.यू. की सहायक आचार्या डॉ. रूबी द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
उन्होंने डीन, सभी आदरणीय संकाय सदस्यों, आयोजकों एवं विद्यार्थियों को उनके सक्रिय सहयोग और सहभागिता के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने जागरूकता कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षा विभाग के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम की समन्वयिका मुख्य रूप से शिक्षा विभाग की सहायक आचार्या सुश्री वैशाली सैनी रही यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिसने एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ किया तथा भारत में शिक्षक शिक्षा के रूपांतरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया।

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