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Tuesday, February 24, 2026

मेरठ शहर के लिए मेट्रो में शुरू हुआ मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम

 


-नमो भारत कॉरिडोर के बचे हुए हिस्से में ग्लोबल लीडर एल्सटॉम ने शुरू किया परिचालन

लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठ। भारत के पहले रीज़नल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम नमो भारत कॉरिडोर के बचे हुए हिस्से स्मार्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी में ग्लोबल लीडर एल्सटॉम ने व्यावसायिक परिचालन शुरू कर दिया है, जो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ को जोड़ता है। इसके अलावा, मेरठ शहर के लिए मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम भी शुरू हो गया है।


मीडिया प्रवक्ता ने बताया कि ये ट्रेनें एल्सटॉम के भारत-निर्मित ट्रेनसेट्स और एलटीई 4जी सिग्नलिंग सॉल्यूशंस पर एडवांस्ड ईटीसीएस हाईब्रिड लेवल 3 द्वारा संचालित होंगी। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के बचे हुए हिस्से के उद्घाटन में न्यू अशोक नगर से सराय काले खाँ (5.5 किलोमीटर) और मेरठ साउथ से मोदीपुरम (21 किलोमीटर) तक तथा मेरठ मेट्रो सेक्शन (21 किलोमीटर) शामिल हैं। इस उपलब्धि के बारे में ओलिवियर लॉयसन के मैनेजिंग डायरेक्टर एल्सटॉम इंडिया ने कहा, एनसीआरटीसी ने आरआरटीएस और अब मेरठ मेट्रो के साथ मिलकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हमें इस सफर में उनका प्रेफर्ड पार्टनर बनने की खुशी है। आरआरटीएस के लिए संपूर्ण कॉरिडोर की शुरुआत और मेरठ मेट्रो के लिए राजस्व सेवा शुरू हो जाने से इस आधुनिक अर्बन रेल नेटवर्क द्वारा इंटर और इंट्रा सिटी विकास के अवसर बढ़ेंगे। इस अभियान में हम एनसीआरटीसी को अपना हर संभव सहयोग देते रहेंगे। गौरतलब है कि नेशनल कैपिटल रीज़न ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एनसीआरटीसी) के नेतृत्व में मिली यह उपलब्धि नेशनल कैपिटल रीज़न में अर्बन मोबिलिटी बढ़ाने तथा मेरठ के निवासियों के लिए इंट्रा-सिटी कम्यूट बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही मेरठ मेट्रो दुनिया का पहला मेट्रो सिस्टम बन गया है, जो लॉन्ग टर्म इवॉल्यूशन (एलटीई) 4जी पर यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) हाईब्रिड लेवल 3 सिग्नलिंग द्वारा संचालित होगा। यह सुरक्षा, एफिशियंसी और संचालन की फ्लेस्बिलिटी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजिकल प्रगति है।


लाखों नागरिकों के जीवन में आएगा सकारात्मक बदलाव

नई मेरठ मेट्रो (एमआरटीएस) कम्यूटर ट्रेनें जन-परिवहन बढ़ाने का एक आकर्षक और सस्टेनेबल विकल्प हैं। बेहतरीन एर्गोनॉमिक्स, सुरक्षा और आराम, कम लाइफ साइकिल लागत और रिसाइकिलिंग की उच्च क्षमता के साथ ये ट्रेनें ट्रैफिक की भीड़, हवा के प्रदूषण और फ्यूल की खपत को कम करती हैं। इनसे यात्रा का खर्च और समय बचता है, शहर के बाहरी इलाके क्षेत्र के आर्थिक केंद्रों से जोड़ते हैं, जिससे लाखों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।


21 किमी लंबे मार्ग पर चलेगी मेरठ मेट्रो

एमआरटीएस ट्रेनें एल्सटॉम की एडेसिया कम्यूटर ट्रेन फैमिली में आती हैं, जो यात्रियों को ओवरहेड लगेज रैक, कोच के अंदर इन्फ़ॉर्मेशन स्क्रीन और सीटों के पास यूएसबी सॉकेट जैसी विशेष सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन ट्रेनों में दिव्यांग लोगों के लिए व्हीलचेयर स्पेस और इमरजेंसी मेडिकल ट्रांसफर के लिए स्ट्रेचर स्पेस भी है। ट्रेनों में इमरजेंसी कम्युनिकेशन की सुविधा दी गई है, इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप के अनुरूप डिज़ाइन किया और बनाया गया है। बतादे कि मेरठ मेट्रो 21 किलोमीटर लंबे मार्ग पर चलेगी और 12 स्टेशनों से होते हुए मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक जाएगी। इस मार्ग के चार स्टेशन दिल्ली-मेरठ नमो भारत आरआरटीएस से जुड़ते हैं, ताकि लोगों को इंटर-सिटी और इंट्रा-सिटी यात्रा की बेहतर सुविधा मिल सके।

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