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Thursday, February 19, 2026

मुकद्दस रमजान का चांद दिखते ही बाजारों में दिखाई दी रौनक, सहरी व इफ्तारी के सामान की सजी दुकानें



प्रखर शर्मा

नित्य संदेश, मवाना। मुकद्दस महीने रमजान का बुधवार में चांद दिखाई दिया इसके साथ ही ख़ुदा की इबादत करने का मुकद्दस महीना भी शुरू हो गया है। चाँद के दीदार होते ही मवाना नगर के खतोलिया चौक, पुरानी सब्जी मंडी चौराहा, सुभाष चौक आदि पर सहरी और इफ्तारी के सामान की दुकान सज गई है।

रमजान की पहली सहरी के लिए अकीदतमंदों ने बुधवार को जमकर सामान खरीदा। बता दें कि आज यानी गुरुवार को पहला रोजा रखा जाएगा माहे रमजान का जहां बड़े लोगों के साथ-साथ बच्चे भी बेसब्री से इंतजार करते हैं तथा बच्चों के परिजन अपने बच्चों का पहला रोजा रखवाने के बाद इस इफतारी के समय फल फ्रूट एवं विभिन्न प्रकार के विशेष व्यंजन बनाकर घर-घर बांटे जाते हैं। इस दौरान घरों में त्यौहार जैसा माहौल रहता है। रमजान के महीने में खजूर से रोजा इफ्तार करने का बड़ा महत्व है। इस दौरान फ्रूट की दुकानों पर खजूर की विभिन्न क्वालिटी देखने को

मिल रही है। रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही खजूर के दामो में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में खजूर 100 प्रति किलो से लेकर 2000 किलो तक भी बेचा जा रहा है। यह बात तो स्वाभाविक है कि माहे रमजान हो या नवरात्र फलों के दाम इस दौरान आसमान छूने लगते हैं। लेकिन श्रद्धा के आगे महंगाई कोई मायने नहीं रखती। रोजेदारों का कहना है कि माहे रमजान में अल्लाह अपने चाहने वालों की गैव से मदद करता है और हर वह चीज मुहय्या हो जाती है जो पूरे वर्ष नसीब नहीं होती। रोजा इंसान को तकवे का आमिल व परहेजदार बनाता है, रोजेदारों पर अल्लाह की रहमत बरसती हैः मौलाना रियाज अंसारी

मौलाना रियाज अंसारी ने जानकारी देते हुए बताया कि रमजान की बड़ी फजीलते हैं मुकद्दस रमजान के पहले दस दिन रहमत के, दूसरे दस दिन मगफिरत के और तीसरे दस दिन जहन्नुम से आजादी हासिल करने केहैं. रोजे की बात करें तो सूर्योदय से पहले (सेहरी) से लेकर सूर्यास्त (इफ्तार) तक मुसलमानों कुराने पाक माहे रमजान में ही को बिना खाए-पिए खुदा की इबादत करनी होती है. रात को तरावीह पढ़नी होती है. 

वहीं कुरान की तिलावत भी रोजेदार कसरत से करते हैं क्योंकि नाजिल हुआ था और कुरान में रमजान की फजीलतें भी बताई गई है। रमजान के महीने में रोजा रखने, इबादत करने, और कुरान पढ़ने, तथा फितरा जकात खैरात अदा करने का का बहुत बड़ा महत्व होता है। रोजा इनसान को तकवा एवं परहेजगार बनाता है रोजे का सवाब अल्लाह पाक खुद देंगे। इस माह में इबादतों का सवाब 70 गुणा बढ़ा दिया जाता है। रोजा रखने वालों पर अल्लाह की रहमत बरसती है तथा रमजान के महीने में अल्लाह ताला रोजेदारों को विभिन्न नेमतो से नवाजता

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