नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा “जेन ज़ी और नैतिक मूल्य”विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. डी.सी. सक्सेना (निदेशक, राष्ट्रीय बोध, एसवीएसयू) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से अजय गुप्ता (अध्यक्ष, स्वामी विवेकानंद गर्ल्स सेंटर कॉलेज) उपस्थित रहे। साथ ही आर.पी. सिंह (निदेशक, सुभारती मीडिया) की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में सरताज अली अहमद तथा मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट पराशर जी भी शामिल रहे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। अपने संबोधन में डॉ. सक्सेना ने विद्यार्थियों से दिन की सकारात्मक शुरुआत, आत्ममंथन और आत्मानुशासन के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का वास्तविक चरित्र तब प्रकट होता है, जब वह अकेला होता है और उसे देखने वाला कोई नहीं होता। उन्होंने माता-पिता एवं शिक्षकों को जीवन का सर्वोच्च मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि वे ही हमें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। दृष्टिहीन व्यक्ति को सड़क पार कराने के उदाहरण से उन्होंने संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया तथा महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट की।
डॉ. सक्सेना ने मानवता, सेवा और सहयोग की भावना पर बल देते हुए कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त संसाधन समस्त मानवता के लिए हैं, अतः हमें उनका सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने धैर्य, संयम और सहनशीलता को कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शक बताया। चरित्र निर्माण को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, सहानुभूति और समानुभूति ही व्यक्ति को समाज में सम्मान और विश्वास दिलाती हैं। अहिंसा के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती; प्रेम, संवाद और समझ ही शांति का मार्ग हैं। मितव्ययिता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताई। साथ ही शून्य, सौरमंडल की अवधारणा एवं निषेचन प्रक्रिया जैसी भारतीय उपलब्धियों का उल्लेख कर विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में नवनीत शर्मा ने आयुर्वेद एवं आधुनिक जीवनशैली पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल का ‘फास्ट फूड’ प्राकृतिक फल-फ्रूट्स होते थे, जो स्वास्थ्यवर्धक थे, जबकि आज का प्रोसेस्ड एवं पैक्ड फूड अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। उन्होंने पाम ऑयल एवं बासी भोजन के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के समापन चरण में संकाय सदस्य डॉ. संतोष कुमार गौतम, डॉ. आशुतोष वर्मा,डॉ. प्रीति सिंह,राम प्रकाश तिवारी, शैली शर्मा एवं, तरुण जैन की उपस्थिति में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. डी.सी. सक्सेना द्वारा अजय गुप्ता को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया तथा आर.पी. सिंह एवं विभागाध्यक्ष द्वारा अतिथियों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रीति सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. रितेश चौधरी द्वारा की गई, जिनके मार्गदर्शन में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, भारतीय संस्कृति और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में अत्यंत सफल सिद्ध हुआ।

No comments:
Post a Comment