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Monday, February 23, 2026

पुरानों पर कार्यवाही, नए पर लापरवाही क्यों?



पुलिस फोर्स मिलने के बाद शुरुवात पुराने या लाल निशान लगाए नए निर्माणों से

तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ। शहर की पहचान मानी जाने वाली सेंट्रल मार्किट, जहां कभी रौनक ही रौनक और चहल-पहल रहती थी, आज अनिश्चितता और खामोशी के साये में है। 25/26 अक्टूबर को 661/6 पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की गई, ने व्यापारियों में भय और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है।

31 प्रतिष्ठान रडार पर, आश्वासन की ‘मीठी गोली’
661/6 के बाद 31 व्यापारिक प्रतिष्ठान भी कार्रवाई की जद में बताए गए। बाजार बंद हुआ, आंदोलन हुआ, जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि अब ध्वस्तीकरण नहीं होगा। मिठाइयां बंटी, पटाखे भी छूटे—लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, दुकानों के टीन शेड उतरने लगे हैं, शटर बंद कर दीवारें खड़ी की जा रही हैं। करीब एक लाख लोगों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।

राजस्व को नुकसान या जेब गरम ?
आरोप हैं कि बाबू, जेई और एई की मिलीभगत से नक्शा पास के बोर्ड लगाकर निर्माण पूरे कराए जा रहे हैं। शिकायतों के बाद एक्सियन साहब द्वारा नोटिस चस्पा किए गए, लाल क्रॉस के निशान लगाए गए—बावजूद इसके कुछ मामलों में कार्रवाई और कुछ में लापरवाही बरती गई ? यही बड़ा सवाल है।

चुनिंदा कार्रवाई पर सवाल
हापुड़ रोड पर कॉम्प्लेक्स का जीना तोड़ा गया, 14/11 पर कार्रवाई हुई, फिर अन्य को अभयदान क्यों?:  
                                             
आवास विकास चौराहे के पास जिम में आग लगने के बाद दोबारा निर्माण—क्या वह वैध है? बॉक्सी पार्क क्या वैध है! 
                                            
239/1 शास्त्री नगर बार-बार अवैध निर्माण के आरोप, नोटिस और लाल निशान के बावजूद दो माह से कार्रवाई नहीं।* 
                                              
सेक्टर 11 में बन रहे फ्लैट: जानकारी के बावजूद केवल नोटिस का ‘खाना पूर्ति’ खेल।* 
                                                  
हर निर्माण पर जेई और एई का एक ही जवाब— नोटिस लगा दिया है, कार्रवाई होगी। लेकिन कब? इसका स्पष्ट उत्तर किसी के पास नहीं।

अब नजर बुलडोजर की अगली दिशा पर
एक्सियन अभिषेक राज का कहना है कि पुलिस फोर्स मिलते ही कार्रवाई होगी। लेकिन संशय यह है कि बुलडोजर पहले नए निर्माणकर्ताओं जिनपर लाल निशान लगाए करीब दो माह हो गए पर चलेगा या पुराने प्रतिष्ठानों पर, जिनसे कई परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है?
                                              
कानून सबके लिए समान है, तो फिर कार्रवाई भी समान क्यों नहीं दिख रही? अब पूरा शास्त्री नगर इसी सवाल के जवाब का इंतजार कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश तो 5 से 35 साल पुरानी दुकानों, कॉम्प्लेक्स, हॉस्पिटल, स्कूल, आदि सभी पर होगा, कार्यवाही भी लगभग सब पर तय दिख रही है ! लेकिन अब जो निर्माण पिछले 1 साल में हो रहे है! उन पर लाल निशान के बाद भी कार्यवाही क्यों नहीं! इनपर किसकी मेहरबानी है! 

सेक्टर 1 से 13 तक में जिम्मेदार बाबू ओर जई जो नोटिस चस्पा कर रहे या। जिनकी सेटिंग या मेहरबानी से ये बन गए! हापुड़ रोड पर एक कॉम्प्लेक्स का जीना टूटा उसके बाद 14/11 पर ध्वस्तीकरण उसके बाद सब नए निर्माण कर्ताओं को अभयदान क्यों?

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