Breaking

Your Ads Here

Monday, February 23, 2026

इंदौर में 'बदलता बाल मन एवं बाल साहित्य' पर वैचारिक विमर्श और काव्यपाठ संपन्न


सपना सीपी साहू 
नित्य संदेश, इंदौर। साहित्य अकादमी (संस्कृति परिषद, मध्य प्रदेश शासन) की बाल साहित्य शोध सृजन पीठ द्वारा हाल ही में इंदौर के सरजू प्रसाद पुस्तकालय में ‘बदलता बाल मन एवं बाल साहित्य की भूमिका’ विषय पर एक गरिमामय परिचर्चा और काव्यपाठ का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने अपने संबोधन में कहा कि बाल मन के बदलाव को हमें आरोपों के बजाय एक 'उपहार' के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि आज तकनीकी हस्तक्षेप और सामाजिक परिवेश के कारण बच्चों के मन में तीव्र परिवर्तन आ रहे हैं, और चुनौती यह है कि क्या हम स्वयं को उस गति से ढाल पा रहे हैं।

कार्यक्रम का वैचारिक सत्र बेहद समृद्ध रहा, जिसकी शुरुआत वाणी जोशी की सरस्वती वंदना से हुई। परिचर्चा के संयोजक गोपाल माहेश्वरी ने बच्चों की चंचलता को सहेजने और बाल साहित्य की सार्थकता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को परोसे जाने वाले साहित्य की गुणवत्ता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। 

इस सत्र में डॉ. मीनू पांडे, मीरा जैन, इंदु पाराशर और आशु कवि प्रदीप ‘नवीन’ जैसे दिग्गजों ने मंच साझा किया। विषय प्रवर्तन देवेंद्र सिंह सिसौदिया ने किया, जबकि प्रथम सत्र का संचालन मुकेश तिवारी और चर्चाकार की भूमिका डॉ. गरिमा दुबे ने निभाई।

द्वितीय सत्र में काव्यपाठ के माध्यम से बाल मन के विभिन्न आयामों को उकेरा गया। इस सत्र में सपना साहू ‘स्वप्निल’, मनीषा बनर्जी, विनीता चौहान, आशा जाकड़, नयन कुमार राठी, डॉ. रेखा मंडलोई और निरुपमा त्रिवेदी सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। 

आयोजन में डॉ. जी.डी. अग्रवाल और विश्वनाथ कदम सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन वाणी जोशी ने किया और अंत में डॉ. मीनू पांडे नयन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here