सलीम जावेद
नित्य संदेश, नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले मैच के बाद मुहम्मद सिराज की क़िस्मत चर्चा में है। कल तक (7 फरवरी 2026 तक) उनका नाम टीम में था ही नहीं—वे रणजी ट्रॉफी खेल रहे थे और स्पेन जाकर रियल मैड्रिड का लाइव मैच देखने की प्लानिंग कर चुके थे (15 फरवरी को रियल मैड्रिड vs रियल सोसिएदाद का मैच)।
रमज़ान की छुट्टियां मनाने और परिवार के साथ समय बिताने का प्लान था, लेकिन 24-48 घंटों में सब पलट गया! हर्षित राणा चोटिल हो गए (वार्म-अप मैच में घुटने की चोट) → सिराज को रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया।
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने फोन किया : "मियां, बैग पैक करो और आ जाओ।" सिराज को लगा मज़ाक़ है, बोले—"सूर्या भाई, मज़ाक़ मत करो!" फिर चयनकर्ता प्रग्यान ओझा का कॉल आया, तब यक़ीन हुआ। मुंबई पहुंचे, रात 3 बजे टीम से जुड़े। जसप्रीत बुमराह बीमार (बुखार) हो गए → सिराज सीधे प्लेइंग XI में! और फिर इंड vs यूएसए मैच में क्या कमाल किया—4 ओवर में 29 रन देकर 3 विकेट झटके! भारत ने 29 रनों से जीत दर्ज की।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होकर सिराज ने कहा : "ऊपर वाले ने पूरी तक़दीर बदल दी... जो भगवान ने लिखा है, कोई बदल नहीं सकता। घर पर टी20 वर्ल्ड कप खेलना मेरा सपना था, और क़िस्मत में यही था इसलिए मैं यहां हूं।"
557 दिन बाद टी20I में वापसी, वो भी वर्ल्ड कप में और पहले ही मैच में हीरो बन गए।
इसे ही कहते हैं क़िस्मत का खेल—मेहनत तो थी ही, लेकिन मौक़ा ऐसे मिला जैसे क़िस्मत खुद हाथ पकड़कर ले आई हो। सिराज की ये कहानी साबित करती है कि कभी-कभी 24 घंटे में भी ज़िंदगी बदल सकती है। ऊपर वाला जो लिखता है, वही होता है!
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