पैदल राहगीर, दोपहिया वाहन चालक, बच्चे और पशु-पक्षी हो रहे घायल
लियाकत मंसूरी
नित्य संदेश, मेरठ। चीनी मांझा एवं कांच-लेपित
धारदार धागों के उपयोग से हर वर्ष अनेक निर्दोष लोग, पैदल राहगीर, दोपहिया वाहन चालक,
बच्चे और पशु गंभीर रूप से घायल होते हैं और कई की जान चली जाती है। यह मांझा अवैध
होने के साथ-साथ अत्यंत खतरनाक है और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
साइक्लोमेड फिट इंडिया के संस्थापक प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
ने कहा कि चीनी मांझा एक मूक हत्यारा है। कोई भी त्योहार या मनोरंजन मानव जीवन से बड़ा
नहीं हो सकता। आज की लापरवाही कल आपके अपने प्रियजनों के लिए घातक साबित हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन से चीनी मांझा की बिक्री और उपयोग पर सख्त कार्रवाई तथा जनता से केवल
सुरक्षित, पारंपरिक सूती मांझा अपनाने की अपील की। साथ ही अवैध मांझा बेचने वालों की
सूचना संबंधित अधिकारियों को देने का आग्रह किया।
क्या है चाइनीज मांझा
चाइनीज मांझा दूसरे मांझों की तरह धागे से नहीं तैयार किया जाता
है, इसके लोग प्लास्टिक का मांझा भी कहते हैं. इसे नायलॅान और मैटेलिक पाउडर से बनाया
जाता है, इसमें एल्युमिनियम ऑक्साइड और लेड मिलाया जाता है. इसके बाद इस मांझे में
कांच या फिर लोहे के चूर से धार भी लगाई जाती है. जिसकी वजह से ये मांझा काफी ज्यादा
घातक हो जाता है. ये मांझा प्लास्टिक की तरह लगता है और स्ट्रेचेबल होता है, जब इसे
लोग खींचते है तो ये टूटता नहीं है बल्कि बड़ा हो जाता है, ऐसे में जब इस मांझे से
पतंग उड़ाई जाती है इसमें कंपन भी पैदा हो जाता है।
इन राज्यों में हैं बैन
भारत सरकार ने चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध लगाया है. इसे खरीदने
और बेचने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 की धारा-15 के तहत 5 साल तक की सजा
और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, यूपी, मध्य
प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसे बेचने और इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगाई गई है।
धागे ने कोर्ट में एक पेंसिल को काट दिया
गत दिनों मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच में जजों ने खुद देखा
कि कैसे यह खतरनाक धागा एक पेंसिल को आसानी से काट सकता है। जजों ने कहा कि अगर पेंसिल
जैसी सख्त चीज़ कट सकती है, तो इंसानों की जान को कितना खतरा है, यह साफ है। उन्होंने
यह भी कहा कि अगर सरकारें इस पर काबू नहीं कर पाईं, तो उन्हें पतंग उड़ाने पर ही रोक
लगानी पड़ सकती है।
मांझे से मेरठ में हुई घटनाएं
6 जनवरी 2025: पीवीएस रोड के पास 21 वर्षीय सुहेल की चाइनीज
मांझे से गला कटने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। उसके पीछे बैठे दोस्त नवाजिश की भी
नाक कट गई थी। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया था, लेकिन अफसोस कि हालात नहीं बदले।
जनवरी 2025: दो साल की मासूम बच्ची इशरा, जो अपने पिता
अब्दुल वाहिद के साथ जा रही थी, मांझे की चपेट में आ गई। उसे बचाने के लिए डॉक्टरों
को 35-36 टांके लगाने पड़े थे। इसी महीने एक अन्य घटना में होमगार्ड आशिक अली का चेहरा
भी मांझे से बुरी तरह कट गया था।
17 फरवरी 2025: शास्त्रीनगर में साजिद (32) चीनी मांझे
से घायल हो गए थे। उनकी गर्दन, कान और उंगली कट गई थी, जिसके लिए उन्हें 16 टांके लगाने
पड़े थे।
मार्च 2025: जाकिर कॉलोनी में हापुड़ रोड पर बाइक पर जाते
समय यूनुस की गर्दन पर चीनी मांझे से गंभीर घाव हुआ था। उन्हें 35 टांके आए थे।
18 दिसंबर 2025: सदर बाजार में बालाजी मंदिर के पास बाइक
सवार तनुज की गर्दन और चेहरे पर चीनी मांझा लिपट गया था। उन्होंने हाईनेक जैकेट पहनी
थी, जिस वजह से उनकी गर्दन बच गई, लेकिन उनका होंठ और चेहरा बुरी तरह कट गया था। इसके
लिए उन्हें 17 टांके लगाने पड़े थे।
पक्षियों की भी ले रहा जान
इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पक्षी भी इस जानलेवा मांझे
का शिकार हो रहे हैं। जनवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में ही नौचंदी थाना क्षेत्र में एक
चील की मांझे में फंसकर तड़प-तड़प कर मौत हो गई। कई अन्य पक्षियों के घायल होने की
खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जो इस समस्या की भयावहता को और बढ़ाती हैं।

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